लोकतांत्रिक समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय संरक्षक ने महाराष्ट्र सरकार के फैसले को बताया भाषायी साम्राज्यवाद, केंद्र से हस्तक्षेप की मांग
दुर्ग। महाराष्ट्र सरकार द्वारा कामकाजी गैर-मराठियों से मराठी भाषा के ज्ञान का प्रमाण पत्र जमा करने के कथित फैसले को लोकतांत्रिक समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय संरक्षक रघु ठाकुर ने अनुचित और अन्यायपूर्ण बताया है। दुर्ग में आयोजित प्रेस वार्ता में उन्होंने कहा कि भाषा के आधार पर इस तरह की व्यवस्था ‘भाषायी साम्राज्यवाद’ को बढ़ावा देने वाली है और यह भारतीय संविधान की भावना के विपरीत है।रघु ठाकुर ने कहा कि महाराष्ट्र में बड़ी संख्या में उत्तर भारतीय परिवहन क्षेत्र से जुड़े हुए हैं। इनमें टैक्सी, कैब और ऑटो चालक शामिल हैं, जो यात्रियों से संवाद करने लायक मराठी जानते हैं। इसके बावजूद यदि उन्हें भाषा ज्ञान का प्रमाण पत्र देना अनिवार्य किया जाता है, तो इससे उनकी रोजी-रोटी पर संकट खड़ा हो सकता है।उन्होंने दावा किया कि महाराष्ट्र में रेहड़ी-पटरी कारोबारियों, हम्मालों, कुलियों तथा छोटे-बड़े कारोबारियों सहित बड़ी संख्या में गैर-मराठी लोग रहते और काम करते हैं। ऐसे लोगों के सामने भाषा के नाम पर रोजगार प्रभावित होने की आशंका है।
हिंदी को लेकर भी उठाए सवाल
रघु ठाकुर ने भारतीय जनता पार्टी और महाराष्ट्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि एक ओर देश में हिंदी के सम्मान की बात की जाती है, वहीं महाराष्ट्र में हिंदी को लेकर अलग स्थिति दिखाई दे रही है। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में त्रिभाषा फार्मूले के तहत हिंदी को पाठ्यक्रम में शामिल किए जाने के बाद इसे हटाने का फैसला उचित नहीं है।उन्होंने केंद्र सरकार की शिक्षा नीति पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि यदि किसी विपक्ष शासित राज्य में केंद्र की शिक्षा नीति का पालन नहीं होता है तो केंद्र सरकार कड़ा रुख अपनाती है, लेकिन महाराष्ट्र के मामले में अलग रवैया दिखाई देता है। उन्होंने इसे भेदभावपूर्ण बताते हुए कहा कि लोकतांत्रिक समाजवादी पार्टी इसका विरोध करती है।
प्रधानमंत्री से महाराष्ट्र सरकार से शिक्षा नीति लागू कराने की अपील
रघु ठाकुर ने बताया कि उनकी पार्टी ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर महाराष्ट्र सरकार से केंद्र की घोषित शिक्षा नीति का अनुपालन कराने और गैर-मराठियों के साथ भाषा के नाम पर हो रहे कथित अन्याय को रोकने की अपील की है।उन्होंने देश और छत्तीसगढ़ के बुद्धिजीवियों से हिंदी के सम्मान और भाषायी सद्भाव की रक्षा के लिए आगे आने की अपील करते हुए कहा कि देश को विभाजनकारी परिस्थितियों से बचाने के लिए एकजुट होकर प्रयास करना जरूरी है।
‘वंदे मातरम राजनीति का शिकार’
प्रेस वार्ता के दौरान वंदे मातरम को लेकर पूछे गए सवाल पर रघु ठाकुर ने कहा कि देश में वंदे मातरम का कोई व्यापक विरोध नहीं है, बल्कि यह राजनीतिक विवाद का विषय बना दिया गया है। उन्होंने कहा कि संविधान सभा द्वारा इसे स्वीकार किए जाने के समय किसी तरह का विरोध नहीं हुआ था। ऐसे में इसे आज विवाद का विषय बनाना अर्थहीन है।
राजनीति में पूंजी के बढ़ते प्रभाव पर जताई चिंता
एक अन्य सवाल के जवाब में रघु ठाकुर ने राजनीति में पूंजीपतियों के बढ़ते प्रभाव पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि जब भी राजनीतिक नेतृत्व को पूंजी के माध्यम से तैयार करने की कोशिश हुई है, तब आम जनता के हित प्रभावित हुए हैं।उन्होंने कहा कि समाज को अलग-अलग हिस्सों में बांटने और जमीनी मुद्दों से जनता का ध्यान भटकाने की कोशिशें हो रही हैं। उनके मुताबिक तकनीक भी कई बार ऐसी परिस्थितियों को बढ़ाने में भूमिका निभा रही है और दुर्भाग्यपूर्ण है कि राजनीतिक नेतृत्व भी इस स्थिति से प्रभावित हो रहा है।
छात्रों की आत्महत्या के मुद्दे पर प्रधानमंत्री को घेरा
रघु ठाकुर ने छात्रों की आत्महत्या के मुद्दे का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री से 22 छात्रों की आत्महत्या के मामले पर ‘मन की बात’ कार्यक्रम में चर्चा करने की अपील की थी। उनके अनुसार, इस मुद्दे पर अपेक्षित चर्चा नहीं हुई और इसके बजाय अन्य विषयों पर बात की गई, जिससे उन्होंने इसे असंवेदनशीलता का परिचायक बताया।उन्होंने लोकतांत्रिक समाजवादी पार्टी की ओर से जागरूक नागरिकों से जनहित और जमीनी मुद्दों को लेकर व्यापक जनजागरूकता अभियान तथा जनआंदोलन संगठित करने की अपील की।
