छुरा में स्वयंसेवकों ने अनुशासन और एकजुटता के साथ निकाला पथ संचलन

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०विजयादशमी उत्सव में संघ के लक्ष्य, पंच परिवर्तन और राष्ट्र निर्माण पर हुआ उद्बोधन, डॉ. ज्योति नारायण दुबे रहे मुख्य अतिथि

गरियाबंद । राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ मंडल छुरा एवं खंड छुरा के तत्वावधान में रविवार को विजयादशमी उत्सव एवं पथ संचलन का आयोजन किया गया। इस दौरान स्वयंसेवकों ने पूर्ण गणवेश में अनुशासन, एकजुटता और राष्ट्रसेवा के संकल्प के साथ नगर के प्रमुख मार्गों से पथ संचलन किया। कार्यक्रम में गरियाबंद जिला सहकार्यवाह भोपेंद्र साहू मुख्य वक्ता तथा लक्ष्मीनारायण अस्पताल, छुरा के संचालक डॉ. ज्योति नारायण दुबे मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।पथ संचलन दोपहर में बस स्टैंड छुरा से प्रारंभ हुआ। स्वयंसेवक घोष के साथ कदम से कदम मिलाकर बजरंग चौक, मस्जिद पारा और नगर पंचायत परिसर होते हुए सदर रोड से वापस बस स्टैंड पहुंचे। नगर के विभिन्न मार्गों से गुजरे पथ संचलन में स्वयंसेवकों का अनुशासन और सामूहिक एकरूपता देखने को मिली। पथ संचलन के समापन के बाद बस स्टैंड परिसर में उद्बोधन कार्यक्रम आयोजित किया गया।

संघ का उद्देश्य राष्ट्र निर्माण और समाज में एकता स्थापित करना
मुख्य अतिथि डॉ. ज्योति नारायण दुबे ने अपने संक्षिप्त उद्बोधन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यों और समाज के प्रति समर्पण की भावना की सराहना करते हुए कहा कि राष्ट्र और समाज के विकास के लिए अनुशासन, एकता तथा सेवा भाव आवश्यक हैं। उन्होंने स्वयंसेवकों से समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करने और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने का आह्वान किया।

पंच परिवर्तन से समाज में सकारात्मक बदलाव का आह्वान
मुख्य वक्ता जिला सहकार्यवाह भोपेंद्र साहू ने अपने उद्बोधन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के लक्ष्य, कार्यपद्धति और राष्ट्र निर्माण में स्वयंसेवकों की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि संघ का उद्देश्य व्यक्ति निर्माण के माध्यम से समाज को संगठित करना और राष्ट्र जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में सकारात्मक परिवर्तन लाना है। संघ की शाखाओं के माध्यम से स्वयंसेवकों में अनुशासन, चरित्र निर्माण, सामाजिक दायित्व और राष्ट्र के प्रति समर्पण की भावना विकसित की जाती है।उन्होंने समाज जीवन में व्यापक सकारात्मक बदलाव लाने के लिए पंच परिवर्तन पर विशेष जोर दिया। इसके अंतर्गत सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी का भाव तथा नागरिक कर्तव्य को अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि इन पांच विषयों को केवल चर्चा तक सीमित न रखकर प्रत्येक व्यक्ति को अपने दैनिक जीवन में व्यवहार के रूप में उतारना चाहिए। सामाजिक भेदभाव से ऊपर उठकर सभी के साथ समानता का व्यवहार, परिवार में संस्कारों का संरक्षण, प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता, स्वदेशी वस्तुओं को प्रोत्साहन और देश के प्रति अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से पालन समाज को सशक्त बना सकता है।

विजयादशमी उत्सव का संघ के लिए विशेष महत्व
मुख्य वक्ता ने विजयादशमी पर्व के महत्व को रेखांकित करते हुए बताया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना 1925 में विजयादशमी के दिन डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने की थी। यह पर्व शक्ति, साहस, विजय और संगठन के संकल्प का प्रतीक है। संघ में विजयादशमी उत्सव के माध्यम से स्वयंसेवक अपने कार्यों की समीक्षा करते हैं तथा राष्ट्र और समाज के प्रति अपने दायित्वों को नए सिरे से स्मरण करते हैं।
उन्होंने कहा कि संघ के उत्सव केवल परंपरागत आयोजन नहीं हैं, बल्कि इनके माध्यम से समाज में एकता, संस्कार, अनुशासन और राष्ट्रभक्ति की भावना को मजबूत करने का प्रयास किया जाता है। उन्होंने स्वयंसेवकों से समाज के बीच रहकर सेवा कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाने और पंच परिवर्तन के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने का आह्वान किया।

स्वयंसेवकों ने लिया राष्ट्रसेवा का संकल्प
कार्यक्रम में संघ के स्वयंसेवकों और कार्यकर्ताओं की सहभागिता रही। आयोजन की तैयारियों एवं संचालन में छुरा खंड के शारीरिक प्रमुख कौशल साहू, खंड कार्यवाह हेमंत कुमार साहू तथा शाखा कार्यवाह डाकेश कुमार साहू सहित संघ के कार्यकर्ताओं का योगदान रहा। कार्यक्रम का समापन राष्ट्र, समाज और संगठन के प्रति समर्पण के संदेश के साथ हुआ।