ज्योतिष शास्त्र में राहु को छाया ग्रह माना गया है। मान्यता है कि, जब राहु की स्थिति प्रतिकूल होती है, तो व्यक्ति के जीवन में अचानक परेशानियां, भ्रम, मानसिक तनाव और बाधाएं बढ़ सकती हैं। कई बार मेहनत के बाद भी सफलता न मिलना, कामों में रुकावट आना या बिना वजह चिंता महसूस होना राहु के प्रभाव से जोड़कर देखा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ऐसे समय में राहु की माता सिंहिका की पूजा और स्मरण करना शुभ माना जाता है। कहा जाता है कि, माता सिंहिका के आशीर्वाद से राहु के उग्र प्रभाव को शांत करने में सहायता मिल सकती है। बुधवार और शनिवार के दिन उनकी आराधना विशेष फलदायी मानी जाती है।
कौन हैं माता सिंहिका?:
पौराणिक कथाओं के अनुसार, सिंहिका ऋषि कश्यप और दिति की पुत्री थीं। वह राहु की माता थीं और अपनी मायावी शक्तियों के लिए प्रसिद्ध थीं। समुद्र मंथन के दौरान उनके पुत्र स्वरभानु ने छल से अमृत ग्रहण किया था, जिसके बाद भगवान विष्णु के सुदर्शन चक्र से उसका सिर और धड़ अलग हो गया। अमृत के प्रभाव से उसका सिर राहु और धड़ केतु कहलाया।
राहु के अशुभ प्रभाव के संकेत:
लगातार मानसिक तनाव और बेचैनी रहना।
बनते हुए कामों में बार-बार रुकावट आना।
परिवार में विवाद और अशांति बढ़ना।
आर्थिक परेशानियां बढ़ना।
अनजाना डर या भ्रम महसूस होना।
बुधवार को करें यह उपाय:
बुधवार के दिन स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें और शांत मन से माता सिंहिका का ध्यान करें। “ॐ सिंहिकायै नमः” मंत्र का 108 बार जाप करने की मान्यता है। इसके साथ काले तिल, उड़द दाल या सरसों के तेल का दान करना भी शुभ माना जाता है।

