नईदिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अंतर-राज्यीय परिषद के नियमों में एक महत्वपूर्ण संशोधन किया है। इसके तहत दिल्ली, पुडुचेरी और जम्मू-कश्मीर जैसे विधानसभा वाले केंद्र शासित प्रदेशों में राष्ट्रपति शासन लागू होने की स्थिति में उपराज्यपालों को परिषद की बैठकों में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया जाएगा। गृह मंत्रालय द्वारा 9 सितंबर को अधिसूचित इस बदलाव को शुक्रवार को प्रकाशित किया गया है। यह संशोधन मई 1990 के मूल ‘अंतर-राज्यीय परिषद आदेश’ को बदलता है।
मई 1990 के मूल आदेश के अनुसार, अंतर-राज्यीय परिषद में प्रधानमंत्री, सभी राज्यों के मुख्यमंत्री, केंद्र शासित प्रदेशों के नामित प्रतिनिधि और 6 केंद्रीय कैबिनेट मंत्री शामिल होते हैं। जुलाई 1990 में इसमें एक प्रावधान जोड़ा गया था, जो केवल राज्यों में अनुच्छेद 356 (राष्ट्रपति शासन) लागू होने पर राज्यपाल की भागीदारी तय करता था।
चूंकी, 2019 में अनुच्छेद 370 के निरस्त होने के बाद जम्मू-कश्मीर के केंद्र शासित प्रदेश बन गया था, ऐसे में नियमों में संशोधन आवश्यक था। वर्तमान में राज्यों के लिए तो पुराना नियम ही रखा गया है, जिसमें लिखा है, ‘उस राज्य के राज्यपाल को परिषद की बैठकों में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया जाएगा।’ नया संशोधन केवल केंद्र शासित प्रदेशों पर ही लागू होगा।
पुडुचेरी में केंद्र शासित प्रदेश अधिनियम, 1963 की धारा 51 के तहत आदेश प्रभावी होने पर उपराज्यपाल को आमंत्रित किया जाएगा। जम्मू और कश्मीर में जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 की धारा 73 के तहत राष्ट्रपति द्वारा जारी आदेश प्रभावी होने पर उपराज्यपाल बैठक का हिस्सा बनेंगे। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली के संदर्भ में अनुच्छेद 239एबी के तहत राष्ट्रपति शासन लागू होने की स्थिति में वहां के उपराज्यपाल आमंत्रित किए जाएंगे।
