महंगाई की मार: खाने-पीने और ईंधन की कीमतों ने बिगाड़ा बजट, 6% पार जाने की आशंका

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नई दिल्ली। नेशनल स्टैटिस्टिक्स ऑफिस (NSO) के हालिया आंकड़ों के मुताबिक, देश में खुदरा महंगाई दर अप्रैल के 3.48% से बढ़कर मई में 3.93% पर पहुंच गई है। इस बढ़ोतरी ने आम जनता की जेब पर बोझ बढ़ा दिया है, जिसका मुख्य कारण खाने-पीने की चीज़ों और ईंधन की कीमतों में आया व्यापक उछाल है। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष और कम बारिश की आशंका जैसे वैश्विक व घरेलू कारणों से आने वाले दिनों में यह दबाव और ज्यादा बढ़ सकता है। क्रिसिल लिमिटेड के अनुमान के मुताबिक, इस फाइनेंशियल ईयर में औसत CPI महंगाई दर 5.1% तक जा सकती है, जो पिछले साल महज 2.0% थी।

विशेषज्ञों का कहना है कि, अगले छह महीनों के भीतर खुदरा महंगाई दर 6% के मनोवैज्ञानिक स्तर को भी पार कर सकती है। हालांकि, अगर कोर महंगाई दर 4% के आसपास स्थिर रहती है, तो रिज़र्व बैंक (RBI) शायद ब्याज़ दरों को लेकर बहुत सख्त कदम न उठाए। चिंता की बात यह भी है कि ग्रामीण इलाकों के मुकाबले शहरी क्षेत्रों में महंगाई कहीं ज्यादा तेजी से पैर पसार रही है। इससे शहरी परिवारों की खर्च करने और खरीदारी करने की क्षमता पर सीधा असर पड़ेगा, जिससे बाजार में गैर-जरूरी चीजों की मांग घट सकती है। राहत की बात सिर्फ इतनी है कि रियल एस्टेट सेक्टर अभी स्थिर है और हाउसिंग क्षेत्र से कीमतों पर कोई अतिरिक्त दबाव नहीं दिख रहा है। आगे चलकर ग्लोबल कमोडिटी की कीमतें और घरेलू नीतियां ही तय करेंगी कि देश का आर्थिक माहौल और ब्याज दरें किस करवट बैठती हैं।