कोयला लेवी मामले में 5 अक्टूबर को होगी सुनवाई, विधायक देवेंद्र यादव समेत 9 आरोपी कोर्ट में होंगे पेश

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रायपुर। छत्तीसगढ़ के 570 करोड़ रुपये के बहुचर्चित कोयला लेवी घोटाले में विशेष न्यायालय ने भिलाई नगर के कांग्रेस विधायक देवेंद्र यादव, पूर्व विधायक चंद्रदेव राय, रामगोपाल अग्रवाल, भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी जयप्रकाश मौर्य और दीपेश टांक समेत नौ आरोपियों को समन जारी किया है। अदालत ने सभी आरोपियों को 5 अक्तूबर को कोर्ट के सामने उपस्थित होने का निर्देश दिया है। आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो इस मामले में साक्ष्यों के आधार पर अंतिम आरोपपत्र पेश करने की तैयारी कर रहा है।

अवैध वसूली का नेटवर्क और मुख्य लाभार्थी:
जांच से खुलासा हुआ है कि कोयला परिवहन करने वालों से अवैध वसूली के लिए ऑनलाइन मिलने वाले परमिट को 15 जुलाई 2020 को खनिज विभाग के तत्कालीन संचालक समीर विश्नोई के आदेश से ऑफलाइन कर दिया गया था। इसके बाद कोल वाशरी संचालकों से 100 रुपये प्रति टन और वाशरी से कोयला निकलने पर 25 रुपये प्रति टन अतिरिक्त परिवहन शुल्क वसूला जाता था। वसूली के लिए कोरबा और रायगढ़ में अलग से कार्यालय खोले गए थे, जहां से निखिल चंद्राकर के माध्यम से रकम अफसरों और नेताओं तक पहुंचाई जाती थी।

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संपत्ति और गहने खरीदे:
वसूली की इस रकम से नेताओं और अधिकारियों ने बड़े पैमाने पर संपत्ति और गहने खरीदे। तत्कालीन मुख्यमंत्री की उप सचिव सौम्या चौरसिया ने 169 बार में 31 करोड़ रुपये प्राप्त किए और अपनी मां के नाम पर 22 संपत्तियां खरीदीं। निलंबित आईएएस रानू साहू ने 13 किश्तों में 5.52 करोड़ रुपये हासिल कर अपने भाई व रिश्तेदारों के नाम पर 13 संपत्तियां खरीदीं। वहीं, विधायक देवेंद्र यादव को 11 किश्तों में तीन करोड़ रुपये मिले, जिसे खैरागढ़ उपचुनाव और उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में खर्च किया गया।

चुनावी खर्च, आभूषण खरीद और वॉट्सएप संदेश:
जांच में सामने आया कि पूर्व विधायक चंद्रदेव राय ने 46 लाख रुपये लिए, जिसमें से 42 लाख रुपये उत्तर प्रदेश चुनाव में लगाए गए। उन्होंने बाकी बचे चार लाख रुपये से रायपुर के एक आभूषण प्रतिष्ठान से अपनी पत्नी के लिए 60 ग्राम सोने का हार खरीदा। इस खरीद से पहले उन्होंने सिंडिकेट के मुख्य आरोपी सूर्यकांत तिवारी से संदेश भेजकर दुकान और हार की पसंद पर सहमति ली थी।

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इसी तरह, विधायक देवेंद्र यादव और सूर्यकांत तिवारी के बीच हुई बातचीत में अनुपम नगर और शंकर नगर में मिलने तथा खैरागढ़ जाने की योजना पर चर्चा दर्ज है। कांग्रेस प्रवक्ता आरपी सिंह ने दो करोड़ एक लाख 40 हजार रुपये लेने की बात स्वीकार करते हुए बताया कि उन्होंने यह पैसा पार्टी के लिए वाहनों और मीडिया प्रबंधन पर खर्च किया। कांग्रेस नेता विनोद तिवारी ने 19 किश्तों में एक करोड़ 87 लाख रुपये प्राप्त कर संपत्तियां खरीदीं और खैरागढ़ चुनाव में रकम लगाई।

अधिकारियों की संलिप्तता और जासूसी के आरोप:
एंटी करप्शन ब्यूरो और आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो ने प्रवर्तन निदेशालय की रिपोर्ट के आधार पर दो पूर्व मंत्रियों, विधायकों और अधिकारियों समेत 36 लोगों पर नामजद प्राथमिकी दर्ज की है। इस घोटाले में आईएएस समीर विश्नोई, रानू साहू, सौम्या चौरसिया, खनिज विभाग के संयुक्त निदेशक एसएस नाग और कारोबारी सूर्यकांत तिवारी की गिरफ्तारी हो चुकी है।

चार्जशीट के अनुसार भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी पारुल माथुर, प्रशांत अग्रवाल और भोजराम पटेल भी सौम्या चौरसिया और सूर्यकांत तिवारी के संपर्क में थे। इन पुलिस अधिकारियों पर विभागीय जानकारी लीक करने का आरोप है। इनमें से एक पुलिस अधिकारी सूर्यकांत तिवारी के कहने पर कोयला ले जाने वाले वाहनों पर कार्रवाई करती थीं। इसके अलावा आरक्षक अमित कुमार दुबे पर जांच एजेंसी के अधिकारियों की जासूसी करने का आरोप लगा है।

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