रायपुर। छत्तीसगढ़ में अपनी वैध नियुक्तियों की मांग को लेकर पिछले 173 दिनों से लगातार धरने पर बैठे D.Ed (डीएड) अभ्यर्थियों के आंदोलन से एक बेहद चिंताजनक खबर सामने आई है। महासमुन्द जिले के निवासी और आंदोलन के डीएड अभ्यर्थी खुलेश्वर राठोर की तबीयत अचानक गंभीर रूप से बिगड़ गई है। अनशन स्थल पर हालत नाजुक होने के कारण उन्हें आनन-फानन में अभनपुर हॉस्पिटल रेफर किया गया है, जहाँ डॉक्टरों की देखरेख में उनका इलाज जारी है।
न्याय की आस में 173 दिनों से आमरण अनशन:
गौरतलब है कि, छत्तीसगढ़ के D.Ed अभ्यर्थी पिछले वर्ष 24 दिसंबर 2025 से लगातार कड़कड़ाती ठंड, चिलचिलाती धूप और अब इस भीषण गर्मी में भी अनिश्चितकालीन आमरण अनशन पर बैठे हुए हैं। अभ्यर्थियों का कहना है कि वे कोई नई या नाजायज मांग नहीं कर रहे हैं, बल्कि माननीय छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए आदेशों का अक्षरशः पालन करने की गुहार सरकार से लगा रहे हैं।
प्रमुख मांगें जिन पर अड़े हैं अभ्यर्थी:
1. 2300 पदों पर तत्काल नियुक्ति: हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार योग्य D.Ed अभ्यर्थियों को रिक्त 2300 पदों पर अविलंब नियुक्ति दी जाए।
2. अधिकारियों की उदासीनता का अंत: 173 दिन बीत जाने के बाद भी शासन-प्रशासन के किसी भी जिम्मेदार अधिकारी द्वारा सुध न लिए जाने से अभ्यर्थियों में भारी आक्रोश और निराशा है।
पीड़ित साथियों का फूटा दर्द:
अनशन स्थल पर मौजूद अन्य डीएड अभ्यर्थियों ने भावुक और आक्रोशित होते हुए कहा- “हम पिछले साढ़े पांच महीनों (173 दिन) से सड़कों पर बैठे हैं। कोर्ट हमारे पक्ष में फैसला दे चुका है, लेकिन प्रशासन की तानाशाही और उदासीनता के कारण आज हमारे साथी खुलेश्वर राठोर की जान दांव पर लग गई है। अगर खुलेश्वर राठोर या किसी भी अन्य अभ्यर्थी को कुछ भी होता है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।”
अभ्यर्थियों ने साफ कर दिया है कि, जब तक सरकार लिखित में उनकी नियुक्ति का आदेश जारी नहीं करती, तब तक उनका यह आंदोलन और आमरण अनशन रुकने वाला नहीं है। उन्होंने प्रदेश सरकार से संवेदनशीलता दिखाते हुए इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करने की मांग की है।
