ड्राइवर स्क्रीन से लेकर MCB तक…पहली बार RCF में तैयार वंदे भारत में सामने आईं बड़ी खामियां

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कपूरथला। देश के सेमी-हाई स्पीड रेल नेटवर्क को विस्तार देने की दिशा में रेलवे बोर्ड ने पंजाब के कपूरथला स्थित रेल कोच फैक्ट्री (RCF) में तैयार की गई पहली 16 कोच वाली वंदे भारत चेयर कार ट्रेन को पटरी पर उतारने की आधिकारिक मंजूरी दे दी है। हालांकि, तकनीकी जांच और ट्रायल के दौरान ट्रेन में कई संवेदनशील खामियां उजागर हुई हैं, जिन पर रेलवे बोर्ड ने गहरी नाराजगी जताते हुए आरसीएफ प्रशासन को तत्काल सुधार के कड़े निर्देश दिए हैं। इनमें लोको पायलट की टचस्क्रीन डिस्प्ले का ठीक से काम न करना, सर्किट ब्रेकर्स पर मार्किंग न होना और फायर एक्सटिंग्विशर के कवर ढीले मिलना शामिल हैं। इसके अलावा, तकनीकी तौर पर 160 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से दौड़ने की मंजूरी मिलने के बावजूद ट्रैक प्रतिबंधों के कारण इसे फिलहाल 130 किमी प्रति घंटे की रफ्तार तक ही सीमित रखा जाएगा।

चेन्नई के बाहर पहली बार RCF में तैयार हुई चेयर कार, अल्स्टॉम प्रोपल्शन से है लैस
देशभर में अब तक दौड़ रहीं सभी वंदे भारत चेयर कार रेक चेन्नई की इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) द्वारा तैयार की गई थीं। कपूरथला रेल कोच फैक्ट्री में 16 डिब्बों वाली चेयर कार का निर्माण पहली बार किया गया है, जिसमें ट्रेन को ऊर्जा और गति देने के लिए फ्रांसीसी बहुराष्ट्रीय कंपनी ‘अल्स्टॉम’ (Alstom) का आधुनिक प्रोपल्शन सिस्टम इस्तेमाल किया गया है। रेलवे बोर्ड ने 23 अक्टूबर को रिसर्च डिजाइन एंड स्टैंडर्ड ऑर्गेनाइजेशन (RDSO), जोनल रेलवेज और चीफ कमिश्नर ऑफ रेलवे सेफ्टी (CCRS) को पत्र जारी कर ट्रेन के संचालन की संस्तुति तो दे दी, लेकिन साथ ही उन तकनीकी पहलुओं की सूची भी थमा दी है जिनका समाधान जरूरी है।

ड्राइवर डिस्प्ले यूनिट की स्क्रीन सुस्त, सिंगल पोल MCB और ट्रैक्शन मोटर पर उठे सवाल
रेलवे बोर्ड के तकनीकी पत्र के अनुसार, ट्रेन के लोको पायलट कैब में लगी ड्राइवर डिस्प्ले यूनिट (DDU) की टचस्क्रीन ठीक से रिस्पॉन्ड नहीं कर रही है। यह स्क्रीन ट्रेन के तमाम कंट्रोल और सुरक्षा मापदंडों की निगरानी के लिए रीढ़ मानी जाती है, लिहाजा इसकी खराब टच सेंसिटिविटी परिचालन के दौरान गंभीर समस्या खड़ी कर सकती है। इसके अलावा, इलेक्ट्रिकल कंट्रोल कैबिनेट में पूर्व की ट्रेनों की तरह डबल पोल एमसीबी की जगह सिंगल पोल मिनिएचर सर्किट ब्रेकर (MCB) लगाए गए हैं, जिससे बिजली की तकनीकी खराबी पकड़ना बेहद जटिल हो जाएगा। इन एमसीबी पर कोई स्पष्ट पहचान लेबल भी नहीं चिपकाए गए हैं, जिससे किसी सर्किट के फेल होने पर तकनीशियनों को फॉल्ट खोजने में भारी वक्त लगेगा। बोर्ड ने 270 किलोवाट क्षमता वाली नई ट्रैक्शन मोटर की उपयुक्तता की जांच के आदेश भी दिए हैं, क्योंकि आईसीएफ की पूर्ववर्ती ट्रेनों में 210 से 225 किलोवाट की मोटरें इस्तेमाल होती रही हैं।

आपातकालीन सुरक्षा में भी लापरवाही, 1 नवंबर को स्लीपर वंदे भारत की बारी
तकनीकी खामियों के साथ-साथ यात्री सुरक्षा से जुड़े उपकरणों में भी ढिलाई पाई गई है। डिब्बों में लगे अग्निशामक यंत्रों (फायर एक्सटिंग्विशर) के ऐक्रेलिक बॉक्स के कवर ढीले और असुरक्षित पाए गए हैं, जिन्हें आपात स्थिति में तुरंत इस्तेमाल करने लायक सुरक्षित बनाने के निर्देश दिए गए हैं। दूसरी ओर, रेलवे बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि रूट पर मौजूदा स्पीड रिस्ट्रिक्शन के चलते ट्रेन 160 के बजाय 130 की अधिकतम गति पर ही चलेगी। इस बीच, रेलवे बोर्ड ने लंबी दूरी के यात्रियों के लिए वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों की शुरुआत की उल्टी गिनती भी शुरू कर दी है। योजना के अनुसार, बेंगलुरु-मुंबई रूट पर पहली वंदे भारत स्लीपर 1 नवंबर को लॉन्च की जा सकती है, जबकि चेन्नई आईसीएफ 10 नवंबर तक 24 कोच वाली वंदे भारत स्लीपर का अंतिम डिजाइन फाइनल कर लेगी।