भुवनेश्वर। ओड़िशा के नुआपाड़ा जिले में एक किसान की आत्महत्या का दुखद मामला सामने आया है। बीजू जनता दल (बीजद) ने इसके लिए सरकारी सिस्टम की लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया है। पार्टी ने मामले की ऊंची जांच कराने और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है।
जानिए पूरा मामला
मृतक किसान का नाम नेपाल माझी था। उन्होंने इस साल धान और मूंगफली की खेती की थी। सरकार की तरफ से उन्हें 30 मई को धान बेचने का टोकन भी मिल गया था।
लेकिन टोकन मिलने के 24 दिन बाद भी अधिकारियों ने उनका धान नहीं खरीदा। कर्ज और परेशानी के कारण उन्होंने बाकी किसानों के साथ मिलकर सरकारी दफ्तर के बाहर प्रदर्शन भी किया, पर कोई सुनवाई नहीं हुई। आखिरकार, मानसिक तनाव और कर्ज के बोझ के कारण उन्होंने सोमवार को जहर खाकर अपनी जान दे दी।
मंडियों में पड़ा है 5 लाख क्विंटल धान
बीजद के बड़े नेता संजय कुमार दास बर्मा अपनी टीम के साथ पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे। उन्होंने जिले की मंडियों का भी दौरा किया।
बीजद ने सरकार के सामने ये मांगें रखी हैं:
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मुआवजा और नौकरी: पीड़ित परिवार को तुरंत पैसा दिया जाए, बच्चों की पढ़ाई मुफ्त हो और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी मिले।
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धान की तुरंत खरीद: मंडियों में अभी भी 5 लाख क्विंटल धान खुले में पड़ा हुआ है। सरकार तुरंत इस धान को उठवाए और फसल खरीदने की आखिरी तारीख को आगे बढ़ाए।
पार्टी का कहना है कि अगर समय पर धान खरीद ली जाती, तो आज एक किसान की जान बच सकती थी।
