विशेषज्ञों ने स्वास्थ्य सेवाओं के लिए किफायती, सुलभ और भारतीय जरूरतों के अनुरूप तकनीक विकसित करने पर दिया जोर

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आईसीएआईएचसी-2026 में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, मशीन लर्निंग और इंटेलिजेंट कंप्यूटिंग के स्वास्थ्य क्षेत्र में उपयोग पर विशेषज्ञों ने किया मंथन

रायपुर। राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) रायपुर के कंप्यूटर एप्लीकेशंस विभाग द्वारा स्वास्थ्य क्षेत्र में एम्बिएंट इंटेलिजेंस पर केंद्रित दो दिवसीय चौथे अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ‘इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन एम्बिएंट इंटेलिजेंस इन हेल्थ केयर (आईसीएआईएचसी-2026) का शुक्रवार को शुभारंभ हुआ। सम्मेलन में शोधकर्ताओं, शिक्षाविदों, तकनीकी विशेषज्ञों और विद्यार्थियों ने मशीन लर्निंग, इंटेलिजेंट कंप्यूटिंग तथा विशेष रूप से स्वास्थ्य सेवाओं में इनके अनुप्रयोगों से जुड़े नवाचारों और अनुभवों पर विचार-विमर्श किया।

उद्घाटन समारोह की शुरुआत दीप प्रज्वलन और राष्ट्रगीत के साथ हुई। इस अवसर पर एनआईटी रायपुर के निदेशक (प्रभारी) डॉ. समीर बाजपेयी, मुख्य अतिथि अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) रायपुर के कार्यकारी निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी लेफ्टिनेंट जनरल (डॉ.) अशोक जिंदल, विशेष अतिथि भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईआईटी) नवा रायपुर के निदेशक डॉ. ओम प्रकाश व्यास, कैलिफोर्निया, अमेरिका स्थित एथेरोपॉइंट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं अध्यक्ष डॉ. जसजीत एस. सूरी, एनआईटी रायपुर के डॉ. मिथिलेश अतुलकर तथा कंप्यूटर एप्लीकेशंस विभाग की प्रमुख डॉ. त्रिप्ति स्वर्णकार उपस्थित रहे।

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सम्मेलन का समन्वय डॉ. त्रिप्ति स्वर्णकार, डॉ. मिथिलेश अतुलकर, डॉ. दिबाकर साहा और डॉ. नईम अहमद द्वारा किया जा रहा है। डॉ. त्रिप्ति स्वर्णकार ने अतिथियों, संकाय सदस्यों और विद्यार्थियों का स्वागत करते हुए सम्मेलन के उद्देश्य और कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की। डॉ. मिथिलेश अतुलकर ने सम्मेलन का विस्तृत परिचय देते हुए बताया कि आईसीएआईएचसी-2026 के लिए 1,200 से अधिक शोध-पत्र प्राप्त हुए हैं। उन्होंने शोध-पत्रों की समीक्षा प्रक्रिया, प्रमुख वक्ताओं और विशेष सत्रों की जानकारी भी साझा की।

डॉ. ओम प्रकाश व्यास ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के विकास की यात्रा को न्यूरल नेटवर्क, मशीन लर्निंग और डीप लर्निंग से लेकर लार्ज लैंग्वेज मॉडल तथा एजेंटिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तक रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि इन तकनीकों का उपयोग लोगों की निरंतर निगरानी, स्वास्थ्य संबंधी संभावित समस्याओं की पहचान और आवश्यकता पडऩे पर चिकित्सकीय परामर्श के लिए अपॉइंटमेंट निर्धारित करने जैसे कार्यों में किया जा सकता है।

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डॉ. जसजित एस. सूरी ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के विकास और मानव कल्याण में एम्बिएंट तकनीकों की बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने महिलाओं के स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाले आंतरिक और बाहरी कारकों का उल्लेख करते हुए स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी और व्यक्तिगत जरूरतों के अनुरूप बनाने में इन तकनीकों की संभावनाओं पर चर्चा की।

डॉ. समीर बाजपेयी ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़ी व्यापक चुनौतियों पर प्रकाश डालते हुए इसकी उच्च लागत और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए सीमित पहुंच को प्रमुख मुद्दा बताया। उन्होंने कहा कि ऐसी तकनीकों को किफायती और सुलभ बनाना आवश्यक है, ताकि दूरस्थ क्षेत्रों और वंचित समुदायों तक भी इनका लाभ पहुंच सके। उन्होंने छत्तीसगढ़ के बस्तर जैसे दूरस्थ क्षेत्रों में तकनीकी पहुंच बढ़ाने की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया।

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मुख्य अतिथि लेफ्टिनेंट जनरल (डॉ.) अशोक जिंदल ने वर्तमान पीढ़ी की तकनीकी जागरूकता की सराहना करते हुए चिकित्सा और इंजीनियरिंग संस्थानों के बीच बेहतर सहयोग की आवश्यकता बताई। उन्होंने भारतीय इंजीनियरिंग संस्थानों, विशेषकर एनआईटी रायपुर, के साथ व्यापक क्लिनिकल डेटा साझा करने पर जोर दिया, ताकि भारत की आवश्यकताओं के अनुरूप संवेदनशील, विश्वसनीय और किफायती चिकित्सा उपकरण विकसित किए जा सकें। उन्होंने कहा कि ‘मेक इन इंडिया पहल के तहत विकसित ऐसी तकनीक आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों तक उन्नत स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुंच बढ़ाने में सहायक हो सकती है। साथ ही उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि स्वास्थ्य सेवाओं में चिकित्सक का मानवीय और व्यक्तिगत स्पर्श महत्वपूर्ण बना रहना चाहिए।