धरती का ‘मानसून कैपिटल’: जहां जमीन को छूते हैं बादल और हर मोड़ पर मिलते हैं झरने, आज ही बनाएं ट्रिप प्लान

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नई दिल्ली। अगर आपको बारिश, हरियाली और धुंध से ढके पहाड़ों का जादू पसंद है, तो मेघालय का ‘मौसिनराम’ (Mawsynram) आपके लिए सपनों जैसी जगह है। ईस्ट खासी हिल्स में बसा यह गांव दुनिया में सबसे ज्यादा औसत वार्षिक वर्षा के लिए जाना जाता है। इसी खासियत के कारण इसे ‘Monsoon Capital of India’ कहा जाता है।

बंगाल की खाड़ी से आने वाली नमी भरी हवाएं जब यहां की खासी पहाड़ियों से टकराती हैं, तो वे ऊपर की ओर उठकर मूसलाधार बारिश का रूप ले लेती हैं। जून से सितंबर के दौरान यहां का नजारा देखने लायक होता है, जब ऊंचे-ऊंचे झरने और तैरते बादल हर सैलानी का दिल जीत लेते हैं। महज 15 किलोमीटर दूर स्थित चेरापूंजी भी अपने बारिश के रिकॉर्ड्स के लिए प्रसिद्ध है।

यहाँ मावजिम्बुइन गुफा की प्राकृतिक स्टैलेग्माइट चट्टानें, भारत के सबसे ऊंचे झरनों में शुमार नोहकलिकाई व सेवन सिस्टर्स फॉल्स, और बरगद की जीवित जड़ों से बने लिविंग रूट ब्रिज मुख्य आकर्षण हैं। मानसून के रोमांच के लिए जून से सितंबर और सुहावने मौसम के लिए अक्टूबर से फरवरी का समय सबसे बेहतरीन रहता है। निकटतम रेलवे स्टेशन और एयरपोर्ट गुवाहाटी है, जहां से शिलांग होते हुए 2-3 घंटे की खूबसूरत सड़क यात्रा करके मौसिनराम पहुंचा जा सकता है।