तिरुवनंतपुरम। केरल से एक बेहद चौंकाने वाला जनसांख्यिकीय आंकड़ा सामने आया है। राज्य के इकोनॉमिक्स और स्टैटिस्टिक्स डिपार्टमेंट की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, केरल में हिंदू और ईसाई समुदायों में अब जन्म दर की तुलना में मृत्यु दर अधिक दर्ज की जा रही है। इसका मतलब है कि इन दोनों समुदायों में ‘नेगेटिव नेचुरल ग्रोथ रेट’ (NGR) यानी नकारात्मक प्राकृतिक वृद्धि दर शुरू हो चुकी है, जहाँ पैदा होने वाले बच्चों से ज्यादा लोगों की मौत हो रही है।
आंकड़ों के मुताबिक, हिंदुओं में यह लगातार दूसरा साल और ईसाइयों में तीसरा साल है जब उनकी जनसंख्या प्राकृतिक रूप से घट रही है। इसके विपरीत, मुस्लिम समुदाय में जन्म लेने वालों की संख्या मौतों से काफी अधिक है, जिसके कारण पूरे केरल की समग्र जनसंख्या वृद्धि दर फिलहाल सकारात्मक बनी हुई है। जानकारों का मानना है कि यदि यही ट्रेंड जारी रहा, तो साल 2041 के आसपास केरल की कुल आबादी घटने लगेगी।
इस बदलाव के पीछे कई सामाजिक और आर्थिक कारण माने जा रहे हैं। केरल में उच्च साक्षरता दर के कारण युवा (विशेषकर महिलाएं) करियर पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं, जिससे शादियों में देरी हो रही है। इसके अलावा, बेहतर अवसरों की तलाश में हिंदू और ईसाई समुदाय के युवाओं का बड़े पैमाने पर केरल से बाहर या विदेशों में पलायन करना भी इस जनसंख्या असंतुलन की एक बड़ी वजह है।
