बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति से जुड़े एक अहम मामले में सख्त टिप्पणी करते हुए कहा है कि, किसी कर्मचारी की सेवा के दौरान मृत्यु के बाद उसके आश्रित को केवल “रिक्त पद नहीं है” कहकर राहत से वंचित नहीं किया जा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि कर्मचारी की मृत्यु होते ही संबंधित पद स्वतः रिक्त माना जाएगा।
यह फैसला न्यायमूर्ति ए.के प्रसाद की एकलपीठ ने “संतोष सिन्हा बनाम छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक” मामले में सुनाया। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अनादि शर्मा ने पक्ष रखते हुए बताया कि, संतोष सिन्हा के पिता बैंक में ऑफिस अटेंडेंट थे और सेवा के दौरान उनका निधन हो गया था। परिवार की आर्थिक स्थिति बिगड़ने पर बेटे ने दो माह के भीतर अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन दे दिया, लेकिन बैंक ने वर्षों तक मामला लंबित रखने के बाद “पद उपलब्ध नहीं” होने का हवाला देकर आवेदन खारिज कर दिया।
सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि, समान परिस्थितियों वाले अन्य मामलों में बैंक नियुक्तियां दे चुका है। अदालत ने माना कि, बैंक का रवैया उसकी अपनी नीति और मानवीय संवेदनाओं के विपरीत है। कोर्ट ने कहा कि, अनुकंपा नियुक्ति योजना का उद्देश्य मृत कर्मचारी के परिवार को तत्काल सहारा देना है, न कि, तकनीकी कारणों से उन्हें भटकाना। हाईकोर्ट ने 30 सितंबर 2022 का बैंक आदेश रद्द करते हुए निर्देश दिया कि, याचिकाकर्ता को 90 दिनों के भीतर किसी भी चतुर्थ श्रेणी पद पर नियुक्ति दी जाए।
