स्वामी आत्मानंद स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल

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० पढ़ाई पर संकट, शिक्षकों की नियमित उपस्थिति और मनमानी को लेकर उठे सवाल

कोरिया । जिले में संचालित स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालयों की शिक्षा व्यवस्था को लेकर अब गंभीर सवाल उठने लगे हैं। बेहतर और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के उद्देश्य से शुरू किए गए इन स्कूलों में आखिर बच्चों की पढ़ाई की वास्तविक स्थिति क्या है?

सूत्रों और अभिभावकों के बीच चर्चा है कि कुछ विद्यालयों में शिक्षकों की नियमित उपस्थिति, समय पर कक्षाएं लगने और बच्चों को निर्धारित पाठ्यक्रम के अनुसार पढ़ाई कराने को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। यदि शिक्षक नियमित रूप से स्कूल और कक्षाओं में उपस्थित नहीं हैं या पढ़ाई प्रभावित हो रही है, तो इसका सीधा नुकसान बच्चों के भविष्य को उठाना पड़ सकता है।

सबसे बड़ा सवाल जिला शिक्षा अधिकारी की निगरानी व्यवस्था पर उठ रहा है। क्या जिले के स्वामी आत्मानंद स्कूलों का नियमित निरीक्षण किया जा रहा है? क्या यह जांच हो रही है कि शिक्षक निर्धारित समय पर विद्यालय पहुंच रहे हैं और बच्चों की कक्षाएं नियमित रूप से संचालित हो रही हैं?
सरकार द्वारा आधुनिक भवन, बेहतर संसाधन और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन यदि जमीन पर बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है तो केवल सुविधाओं और कागजी आंकड़ों से शिक्षा व्यवस्था मजबूत नहीं हो सकती।

शिक्षा विभाग से उठते हैं ये अहम सवाल—
0  क्या सभी शिक्षक प्रतिदिन समय पर विद्यालय पहुंच रहे हैं?
0 क्या बच्चों की निर्धारित समय-सारणी के अनुसार नियमित कक्षाएं लग रही हैं?
0  स्कूलों में पढ़ाई की गुणवत्ता की जांच कौन और कब करता है?
0 जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा आखिरी बार इन स्कूलों का निरीक्षण कब किया गया?
0 जिन विद्यालयों में लापरवाही पाई जाती है, वहां जिम्मेदारी तय कर क्या कार्रवाई की जाती है?

कोरिया जिले के बच्चों का भविष्य किसी भी लापरवाही से बड़ा है। जिला शिक्षा अधिकारी और संबंधित अधिकारियों को चाहिए कि वे स्वामी आत्मानंद स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था का गंभीरता से निरीक्षण करें, शिक्षकों की नियमित उपस्थिति और कक्षाओं की वास्तविक स्थिति की जांच कराएं तथा यदि कहीं अनियमितता पाई जाती है तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई सुनिश्चित करें।सवाल साफ है—क्या स्वामी आत्मानंद स्कूल केवल बेहतर भवन और सुविधाओं तक सीमित रह जाएंगे, या वास्तव में बच्चों को गुणवत्तापूर्ण और नियमित शिक्षा भी मिलेगी?
अब जिला शिक्षा विभाग को इन सवालों का जवाब देना होगा, क्योंकि मामला सीधे बच्चों के भविष्य से जुड़ा है।