दंतेवाड़ा। वन विभाग ने गीदम थाना क्षेत्र में दुर्लभ वन्यजीव पैंगोलिन की खाल की तस्करी कर रहे छह तस्करों को पकड़ा है। अधिकारियों ने आरोपियों के पास से लगभग 14 किलो पैंगोलिन की खाल और शल्क बरामद किए हैं। दावा किया जा रहा है कि तस्करों ने लगभग छह से सात पैंगोलिन का शिकार करने के बाद यह खाल जुटाई है। वन विभाग को सूचना मिली थी कि गीदम वन परिक्षेत्र में कुछ लोग वाहनों में पैंगोलिन की खाल लेकर ग्राहक की तलाश में घूम रहे हैं। इस आधार पर अधिकारियों ने छह आरोपियों को हिरासत में लिया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में पैंगोलिन की खाल की कीमत लाखों रुपये बताई जाती है।
ऐसे हत्थे चढ़े आरोपी:
वन विभाग को मुखबिर से जानकारी मिली थी कि कुछ तस्कर गीदम वन परिक्षेत्र के भीतर पैंगोलिन की खाल बेचने के लिए अलग-अलग गाड़ियों में घूम रहे हैं। सूचना मिलते ही वन विभाग की विशेष टीम ने गीदम पुलिस थाना के पास घेराबंदी करके तीन लोगों को हिरासत में ले लिया। पकड़े गए आरोपियों से पूछताछ के आधार पर टीम को पता चला कि उनके कुछ साथी जावंगा के पास भी मौजूद हैं। इसके बाद टीम ने जावंगा के पास दबिश देकर अन्य तीन लोगों को पकड़ा।
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वाहनों की तलाशी के दौरान अधिकारियों को एक गाड़ी में टायर की स्टेपनी के पास रखी बोरी में छिपाई गई पैंगोलिन की खाल और शल्क मिले। जब्त सामग्री का कुल वजन करीब 14 किलो निकला। अधिकारियों के अनुसार एक वयस्क पैंगोलिन से लगभग दो से ढाई किलो खाल निकलती है। इसी आधार पर यह अनुमान जताया गया है कि आरोपियों ने इस खेप को तैयार करने के लिए छह से सात पैंगोलिन का शिकार किया होगा। वन विभाग की टीम यह पता लगा रही है कि इन वन्यजीवों का शिकार किस जगह किया गया था और तस्कर इसे किसे बेचने वाले थे।
आरोपियों की पहचान और मुख्य तस्कर का रिकॉर्ड:
आरोपियों की पहचान दंतेवाड़ा और बीजापुर जिले के निवासियों के रूप में हुई है। शुरुआती जांच में आरोपियों के नाम लक्ष्मण तेलाम, दीपक, मासा मूर्ति, हेमंत वासम, कुहरम भीमा और मासाराम मंडावी सामने आए हैं। इनमें से लक्ष्मण तेलाम दंतेवाड़ा जिले का रहने वाला है, जबकि अन्य पांच आरोपी बीजापुर जिले के निवासी हैं। वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि आरोपी लक्ष्मण तेलाम का पहले से ही आपराधिक रिकॉर्ड रहा है और वह इससे पूर्व भी बाघ की खाल की तस्करी के मामले में जेल जा चुका है।
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अंधविश्वास, वैज्ञानिक तथ्य और कानूनी सजा:
पैंगोलिन दुर्लभ स्तनधारी वन्यजीव है, जिसके शरीर पर कठोर शल्क होते हैं। ये शल्क केराटिन नामक प्रोटीन से बने होते हैं, जिससे इन्सानों के बाल और नाखून बनते हैं। खतरा महसूस होने पर यह जीव अपने शरीर को गोल आकार में समेट लेता है। यह मुख्य रूप से चींटियां और दीमक खाकर जंगल के पारिस्थितिकी तंत्र में अहम भूमिका निभाता है। अफवाहों के चलते पैंगोलिन का शिकार किया जाता है, क्योंकि यह भ्रांति फैली है कि इसकी खाल से यौन शक्ति बढ़ाने की दवा बनाई जाती है। हालांकि, इसका कोई विश्वसनीय वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।
वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत पैंगोलिन और उसके अंगों का अवैध शिकार, उन पर कब्जा और व्यापार दंडनीय अपराध है। कानून के मुताबिक दोषी पाए जाने पर तीन से सात साल तक की जेल और कम से कम 25 हजार रुपये जुर्माने का प्रावधान है। दोबारा अपराध करने पर न्यूनतम जुर्माना एक लाख रुपये हो सकता है। यह कार्रवाई डीएफओ रंगनाधा राधाकृष्णा वाय और एसडीओ शिवेंद्र सिंह के निर्देश पर गीदम रेंजर शिव टंडन, बचेली रेंजर
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