नई दिल्ली । संभल हिंसा मामले के मुख्य आरोपी मुल्ला अफरोज को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने मुल्ला अफरोज पर लगाया गया एनएसए (राष्ट्रीय सुरक्षा कानून) रद्द कर दिया है और उसकी जमानत याचिका को मंजूर कर लिया। इसके साथ ही कोर्ट ने यूपी सरकार पर सख्त टिप्पणी करते हुए 10 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यूपी सरकार ने गैरकानूनी तरीके से मुल्ला अफरोज पर एनएसए लगाया था। कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का वह फैसला भी रद्द कर दिया जिसमें एनएसए के पक्ष में फैसला दिया गया था। यह पूरा मामला संभल हिंसा से जुड़ा है। मुल्ला अफरोज पर नवंबर 2024 में उत्तर प्रदेश के संभल में शाही जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान भड़की हिंसा का मुख्य साजिशकर्ता होने का आरोप है। बताया जा रहा है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट से जमानत मिलने के तुरंत बाद अक्टूबर 2025 में यूपी सरकार ने उस पर एनएसए लगाकर दोबारा गिरफ्तार कर लिया था। इसी कार्रवाई को चुनौती देते हुए मुल्ला अफरोज ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी।
इस याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए थे। कोर्ट ने यूपी सरकार से पूछा था कि क्या पुलिस कस्टडी में दिए गए ऐसे बयान को एनएसए के तहत हिरासत का आधार बनाया जा सकता है, जो कानूनी रूप से अदालत में मान्य नहीं होता।
वहीं, उत्तर प्रदेश सरकार ने अपनी कार्रवाई का बचाव किया था। सरकार ने दलील दी थी कि मुल्ला अफरोज की रिहाई से क्षेत्र में दोबारा हिंसा भड़कने या सार्वजनिक व्यवस्था बिगड़ने की पूरी आशंका थी। इसलिए कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए निवारक नजरबंदी जरूरी थी।
हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने सरकार की इस दलील को नहीं माना। कोर्ट ने माना कि एनएसए लगाने की प्रक्रिया गैरकानूनी थी और इस कानून का गलत इस्तेमाल किया गया।
