चलती स्लीपर बस में नाबालिग से सामूहिक दुष्कर्म समेत हालिया घटनाओं पर जताई चिंता, कहा-कानून व्यवस्था और पुलिस प्रशासन की नाकामी उजागर
नई दिल्ली। दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में महिलाओं के खिलाफ हाल में सामने आई यौन अपराधों की घटनाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने दिल्ली में चलती स्लीपर बस में 16 वर्षीय नाबालिग से सामूहिक दुष्कर्म की घटना समेत हालिया बलात्कार के मामलों पर स्वत: संज्ञान लिया है। सोमवार, 28 सितंबर को मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने घटनाओं को झकझोर देने वाला बताते हुए कहा कि ये कानून व्यवस्था और पुलिस प्रशासन की विफलता को स्पष्ट रूप से दर्शाती हैं।
लाइव लॉ और अदालत से संबंधित आधिकारिक विवरण के अनुसार, न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला की अध्यक्षता वाली पीठ ने महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई। पीठ ने कहा कि हाल की घटनाओं को देखकर वर्ष 2012 के निर्भया मामले के साथ उनकी दर्दनाक समानताओं को रेखांकित किए बिना नहीं रहा जा सकता। अदालत ने कहा कि ऐसी घटनाएं कानून व्यवस्था और पुलिस प्रशासन की नाकामी को उजागर करती हैं।
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सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर में सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षा व्यवस्था की कमी को लेकर भी पुलिस और प्रशासन को फटकार लगाई। अदालत ने कहा कि पार्क, बस और अन्य सार्वजनिक स्थान केवल रोशनी की कमी, निगरानी के अभाव तथा बुनियादी प्रशासनिक सुविधाओं की कमी के कारण उच्च जोखिम वाले क्षेत्र नहीं बन सकते।
अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल संवेदना या एकजुटता व्यक्त करना पर्याप्त नहीं है। महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जमीन पर ठोस और प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता है। सुप्रीम कोर्ट ने मामले में स्वत: संज्ञान लेते हुए कड़ी न्यायिक निगरानी शुरू कर दी है। अदालत ने दिल्ली सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार, दिल्ली पुलिस आयुक्त और नोएडा पुलिस को नोटिस जारी कर तत्काल कार्रवाई रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है।
अदालत ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में संचालित सभी निजी और व्यावसायिक बसों के चालकों तथा परिचालकों के अनिवार्य पुलिस सत्यापन के निर्देश भी दिए हैं। इसके अलावा बसों में आपातकालीन बटन और निगरानी कैमरों की स्थिति की जांच करने को कहा गया है। अदालत ने केंद्र और राज्य की संबंधित एजेंसियों को दिल्ली-एनसीआर के सभी अंधेरे तथा कम रोशनी वाले सार्वजनिक पार्कों और सड़कों का तत्काल सुरक्षा परीक्षण करने को कहा है। इन स्थानों पर निगरानी कैमरे और पर्याप्त मार्ग प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
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इससे पहले राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और दिल्ली महिला आयोग भी मामले का संज्ञान ले चुके हैं। दोनों संस्थाओं ने पुलिस से सात दिन के भीतर जवाब मांगा था। अब सुप्रीम कोर्ट ने मामले की निगरानी अपने हाथ में ले ली है।
मामला अगस्त 2026 के शुरुआती सप्ताह में सामने आया था। उत्तर प्रदेश के मैनपुरी की रहने वाली 16 वर्षीय नाबालिग अपने एक रिश्तेदार से मिलने नोएडा आई थी। इसके बाद दिल्ली जाने के दौरान एक स्लीपर बस के चालक और परिचालक ने उसे मदद का झांसा देकर बस में बैठा लिया। आरोप है कि करीब 47 किलोमीटर के सफर के दौरान चलती बस में दोनों ने नाबालिग के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया। आरोपियों ने पीडि़ता को जान से मारने की धमकी भी दी। दुष्कर्म के बाद उसे दिल्ली के कश्मीरी गेट बस अड्डे के पास एक सुनसान स्थान पर छोड़कर आरोपी फरार हो गए।
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि कथित अपराध में इस्तेमाल की गई बस के खिलाफ करीब 63 हजार रुपये का पुराना चालान लंबित था। आरोप है कि बस बिना वैध परमिट, निर्धारित गति सीमा और जरूरी सुरक्षा मानकों का पालन किए सड़कों पर संचालित हो रही थी। इस घटना के सामने आने के बाद लोगों में काफी रोष है। अब सुप्रीम कोर्ट की ओर से स्वत: संज्ञान लिए जाने और दिल्ली-एनसीआर में सार्वजनिक परिवहन तथा सार्वजनिक स्थानों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर दिए गए निर्देशों से संबंधित एजेंसियों पर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी बढ़ गई है।
