नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने मणिपुर में सशस्त्र बल (विशेष शक्तियां) अधिनियम (AFSPA) का दायरा अगले छह महीने के लिए बढ़ा दिया है। गृह मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार, 1 अक्टूबर 2026 से पूरे मणिपुर को ‘अशांत क्षेत्र’ माना जाएगा, हालांकि 13 पुलिस थाना क्षेत्रों को इसके दायरे से बाहर रखा गया है। यह आदेश छह महीने तक प्रभावी रहेगा, जब तक इसे पहले वापस नहीं लिया जाता।सरकार ने यह फैसला राज्य में जारी हिंसा और सुरक्षा स्थिति को देखते हुए लिया है। मणिपुर में मैतेई और कुकी-जो समुदायों के बीच 2023 से जातीय संघर्ष जारी है। गृह मंत्रालय पहले भी राज्य के बड़े हिस्से को AFSPA के तहत ‘अशांत क्षेत्र’ घोषित करता रहा है।
सशस्त्र बलों को मिलती हैं विशेष शक्तियां
AFSPA की धारा 3 के तहत किसी क्षेत्र को ‘अशांत क्षेत्र’ घोषित किए जाने के बाद वहां तैनात सशस्त्र बलों को कानून में निर्धारित विशेष अधिकार मिलते हैं। इनमें कुछ परिस्थितियों में बिना वारंट गिरफ्तारी, तलाशी और बल प्रयोग की शक्तियां शामिल हैं।
कामजोंग में चार लोगों की हत्या से बढ़ी चिंता
यह फैसला ऐसे समय आया है जब मणिपुर में हिंसा की नई घटनाएं सामने आई हैं। कामजोंग जिले में म्यांमार सीमा के पास पिलोंग गांव में चार लोगों के शव मिलने के बाद सुरक्षा स्थिति को लेकर चिंता बढ़ी है। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि म्यांमार की ओर से आए संदिग्ध हमलावरों ने ग्रामीणों पर हमला किया था।मुख्यमंत्री वाई. खेमचंद सिंह ने घटना की निंदा करते हुए कहा कि इस तरह की हिंसा के लिए समाज में कोई जगह नहीं है और इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
फरवरी से 40 से ज्यादा मौतों का दावा
अधिकारियों के अनुसार, फरवरी में नागा और कुकी समुदायों के बीच झड़पों के बाद से राज्य में 40 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। सितंबर में भी तामेंगलोंग जिले में अलग-अलग गोलीबारी की घटनाओं में कई लोगों की मौत हुई थी।मणिपुर में मई 2023 से मैतेई और कुकी-जो समुदायों के बीच हिंसक संघर्ष जारी है, जिसके कारण बड़े पैमाने पर विस्थापन और सुरक्षा संबंधी चुनौतियां सामने आई हैं।
