बाजार में दिखी 4 सालों में सबसे बड़ी वीकली गिरावट, नए रिकॉर्ड लो पर फिसला रुपया

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दिल्ली। वेस्ट एशिया में बढ़ते जियोपॉलिटिकल टेंशन की वजह से इंडियन बेंचमार्क इंडेक्स लगभग चार साल में सबसे ज़्यादा वीकली गिरावट पर आ गए। मंगलवार के सेशन को छोड़कर बाकी सभी दिनों में मार्केट कमज़ोर ग्लोबल संकेतों, रुपये में लगातार गिरावट, FII की लगातार सेलिंग और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच नीचे बंद हुआ। 13 मार्च को खत्म हुए हफ्ते में BSE सेंसेक्स 5.51 फीसदी यानी 4,354.98 अंक गिरकर 74,563.92 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 50 1,299.35 अंक यानी 5.31 फीसदी गिरकर 23,151.10 पर बंद हुआ।

इस हफ़्ते स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया के मार्केट कैपिटलाइज़ेशन में सबसे ज़्यादा गिरावट देखने को मिली। इसके बाद लार्सन एंड टूब्रो, HDFC बैंक और बजाज फाइनेंस में दबाव दिखा। वहीं दूसरी तरफ NTPC, पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन ऑफ़ इंडिया और सन फार्मास्युटिकल इंडस्ट्रीज़ के मार्केट कैपिटलाइज़ेशन में बढ़त देखने को मिली।

ऑटो और बैंकिंग स्टॉक्स में भारी गिरावट की वजह से सभी सेक्टोरल इंडेक्स लाल निशान पर बंद हुए। निफ्टी ऑटो 10.6% गिरा, निफ्टी PSU बैंक 7.2% गिरा, निफ्टी डिफेंस और निफ्टी प्राइवेट बैंक 7-7% गिरे, जबकि निफ्टी मेटल 6% गिरा।

 

फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (FIIs) ने लगातार चौथे हफ़्ते अपनी बिकवाली जारी रखी और 35,052.03 करोड़ रुपये के शेयर बेचे, जबकि डोमेस्टिक इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (DIIs) 37,739.78 करोड़ रुपये की खरीदारी के साथ नेट बायर बने रहे।

लगातार जियोपॉलिटिकल टेंशन के बीच शुक्रवार के सेशन में भारतीय रुपये में लगातार दूसरे हफ़्ते गिरावट जारी रही, और यह US डॉलर के मुकाबले 92.47 के नए रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया। करेंसी हफ़्ते के आखिर में 13 मार्च को अब तक के सबसे निचले स्तर 92.45 के पास बंद हुई, जो 6 मार्च के 91.74 से 71 पैसे कम है, और यह 91.74–92.47 की वीकली रेंज में ट्रेड कर· रही है।