मुजफ्फरनगर। मुजफ्फरनगर में पिछले पांच महीने में 10 चर्चित प्रकरणों में 23 दोषियों को फांसी की सजा सुना चुके अपर जिला एवं सत्र न्यायालय रवि कुमार दिवाकर ने कहा कि पश्चिम यूपी के माफिया-गैंगस्टरों ने उनसे संपर्क कर संदेश भिजवाया है कि उनके पीछे पड़ा तो वे कोर्ट बदलवा देंगे या जिले से बाहर ट्रांसफर करवा देंगे। जज दिवाकर ने कहा, मैं मरना पसंद करूंगा, डरपोक जज कहलाना नहीं। मुजफ्फरनगर के कस्बा शाहपुर में आठ साल पहले घरेलू विवाद में जिंदा जलाई गई शहजादी (23) के शौहर को फांसी की सजा सुनाते हुए जज दिवाकर ने अपने ऊपर उठ रहे सवालों का भी जवाब दिया।
उन्होंने फैसले में लिखा, मेरे माता-पिता ने भगवान के सिवा किसी अन्य से नहीं डरने की शिक्षा दी है। यदि न्यायाधीश बाहुबलियों, माफिया या अपराधियों के दबाव में काम करने लगे तो जनता का न्यायपालिका पर भरोसा कमजोर होगा। यदि मैं ऐसी शक्तियों से भयभीत हो जाऊंगा तो मेरे लिए न्यायिक संस्था से इस्तीफा देना ही उचित होगा। फैसले में जज दिवाकर ने लिखा, मुझे संदेश भिजवाया गया है कि अभी मेरे पास से सिर्फ पत्रावलियां हटवाई गई हैं, यदि मैं उनके पीछे पड़ा या टिप्पणी की तो प्रभाव का इस्तेमाल कर कोर्ट बदलवा दिया जाएगा या बाहर ट्रांसफर करा दिया जाएगा।
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गवाह मुकरे तो मृत्यु पूर्व बयान को पर्याप्त माना
जज दिवाकर ने शहजादी को जिंदा जलाने के मामले में शौहर नदीम को फांसी की सजा सुनाई। उन्होंने वादी के पिता समेत अन्य गवाहों के पवद्रोही हो जाने के बावजूद मजिस्ट्रेट को मृत्यु पूर्व दिए गए बयान के आधार पर यह सजा सुनाई। उन्होंने फैसले में लिखा, अबला नारी को जिंदा जलाने वाला सहानुभूति का हकदार नहीं है।
जज दिवाकर का इंसाफ…155 दिन में 23 दोषियों को मृत्युदंड
मुजफ्फरनगर फास्ट ट्रैक कोर्ट संख्या-3 के पीठासीन अधिकारी रवि कुमार दिवाकर ने छह अप्रैल से सात सितंबर तक 155 दिन में 10 मामलों में 23 दोषियों को फांसी की सजा सुनाई है। मुजफ्फरनगर में न्यायालय की स्थापना के 70 साल में यह रिकॉर्ड है।
12 अप्रैल 1956 को मेरठ से विभाजन कर जिले में अस्थायी न्यायालय शुरू हुआ। बाद में 14 जुलाई 1958 को स्थायी तौर पर काम शुरू किया गया। इसी साल छह अप्रैल से सात सितंबर तक 155 दिन में फास्ट ट्रैक कोर्ट संख्या तीन के पीठासीन अधिकारी रवि कुमार दिवाकर ने न्याय का नया अध्याय जोड़ दिया। 10 मामलों में अब तक 2 लोगों को फांसी की सजा सुनाई जा चुकी है।
इन मामलों में सुनाया फैसला
एडवोकेट समीर सैफी हत्याकांड (06 अप्रैल 2026) 15 अक्तूबर 2019 को 40 लाख रुपये के लेन-देन के विवाद में अधिवक्ता समीर सैफी की हत्या कर दी गई थी। अदालत ने सिंगोल अल्वी, सोनू उर्फ रिजवान और शालू उर्फ अरबाज को मृत्युदंड सुनाया।
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शेखर हत्याकांड (28 अप्रैल 2026)
भौराकलां थाना क्षेत्र के सिसौली निवासी शेखर की वर्ष 2019 में 70 हजार रुपये के लेन-देन के विवाद में पास के गांव खेड़ी सूंडियान में हत्या कर दी गई थी। अदालत ने दोषी मुकेश, उसके बेटे प्रदीप, संदीप और सोनू को मृत्युदंड सुनाया।
राजेश देवी-हिमांशु हत्याकांड (30 मई 2026)
छपार के सलेमपुर गांव निवासी सुरेश की पत्नी राजेश देवी अपने छह वर्षीय बेटे हिमांशु के साथ नवंबर 2011 को घर से निकली थीं। चरथावल में दोनों की लाश मिली हत्या के मामले में अदालत ने दोषी रईस को मृत्युदंड की सजा सुनाई।
राजेंद्र सैनी हत्याकांड (20 जून 2026)
ककरौली निवासी राजेंद्र सैनी की वर्ष 2018 में हत्या कर शव को जलाने के मामले में अदालत ने रामकरण उर्फ सावन गिरी और गीलू को मृत्युदंड सुनाया। मामले के एक आरोपी वीरसैन की सुनवाई के दौरान मृत्यु हो चुकी थी।
होमगार्ड रतिराम हत्याकांड (02 जुलाई 2026)
शहर कोतवाली के बुढ़ाना मोड़ पर वर्ष 2020 में गश्त के दौरान होमगार्ड रतिराम की चाकू मारकर हत्या कर दी गई थी। मामले में केस दर्ज हुआ। इसके बाद अदालत ने दोषी दीपक को मृत्युदंड की सजा सुनाई।
