किन्नर से प्रेम संबंध के कारण पति को छोड़ा, दूसरी महिला को भेजा गया नारी निकेतन 

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रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ किरणमयी नायक द्वारा राज्य की महिलाओं को त्वरित राहत पहुँचाने के उद्देश्य से एक वृहद और संवेदनशील निर्णय लिया गया है। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर आयोग द्वारा आगामी 12 मार्च 2026 को रायपुर संभाग के लिए महा जन.सुनवाई सप्ताह का आयोजन छ.ग. राज्य महिला आयोग कार्यालय, जिला रायपुर में किया जा रहा है। आज रायपुर संभाग में 01 महा जन.सुनवाई व प्रदेश स्तर पर 389 वी एवं जिला स्तर पर 178 वी सुनवाई हुई। जिसमें रायपुर संभाग के अंतर्गत आने वाले जिले रायपुर, बलौदाबाजार, गरियाबंद, धमतरी, महासमुंद के कुल 292 प्रकरणों की एक साथ सुनवाई की गई।

इस महा जन.सुनवाई में रायपुर संभाग के जिला बलौदाबाजार के 43 में से 16 प्रकरण, धमतरी के 12 में से 07 प्रकरण, रायपुर के 199 में से 115 प्रकरण महासमुंद के 23 में से 06 प्रकरण तथा गरियाबंद के 15 में से 04, प्रकरण नस्तीबद्ध किया गया। कुल 292 प्रकरण में से 48 प्रकरण नस्तीबद्ध किया गया। दोनो पक्षो के कुल 62 पक्षकारो ने पंजीयन कराया था बाकी पक्षकार अनुपस्थित है जिसमें आगामी निराकरण हेतु प्रकरण प्रस्तुत किया जायेगा।

आज की सुनवाई में एक प्रकरण में आवेदिका विधवा बहू है और अनावेदक उनके सास-ससुर, ननंद है। एक ही घर में उपर-नीचे रहते है। जिससे आपस में विवाद हुआ और घरेलू हिंसा का मामला न्यायालय में है। अनावेदिक ने कहा कि वह घर से आवेदिका को नही निकालेंगे बिजली पानी बंद नही करेंगे चूंकि न्यायालय में प्रकरण विचाराधीन है इस स्तर पर प्रकरण नस्तीबद्ध किया गया व प्रोटेक्शन आॅफिसर को नियुक्त कर दोनो पक्षों की निगरानी 1 वर्ष तक किये जाने का आदेश आयोग द्वारा दिया गया।

एक प्रकरण में आवेदिका ग्राम भुंजिया मुड़ा में पंचायत सचिव है। इसके पूर्व मालगांव व नागाबुड़ा में पुचायत सचिव पी अनावेदक 1, 2 दोनो गांव के उपसरपंच है। दोनो गांव में अनावेदकगण के द्वारा कराये गये कार्यो का बिल भुगतान दोनो अनावेदक के शिकायत के कारण रूका है अनावेदक परेशान करने झूठी शिकायत करते है। उभय पक्ष ने बताया कि उनके द्वारा पूर्व कि शिकायत वापस लेकर वर्तमान में कोई शिकायत नही है। भविष्य में भी कोई शिकायत नही करेंगे। आवेदिका को किसी भी तरह से परेशान नही करेंगे इस स्तर पर आवेदिका की समस्या का समाधान हो गया है स्थाई समाधान के लिए आयोग द्वारा सी.ई.ओ. गरियाबंद को आर्डरशीट की काॅपी के साथ एक पत्र प्रेषित किया जायेगा। इस स्तर पर प्रकरण नस्तीबध्द किया गया।

एक अन्य प्रकरण में आवेदिका ने बताया कि आवेदिका अनावेदक आपस में पति-पत्नि है आवेदिका ने बताया अनावेदक पति अनावेदक किन्नर के साथ संबंध में है। जिसके कारण आवेदिका का परिवारिक जीवन नष्ट हो चुका है। आयोग की समझाईश पर आवेदिका को आजीवन भरण-पोषण हेतु 5 लाख देने के लिए तैयार है। जो तीन किश्तों में दिया जायेगा। इस हेतु आवेदिका ने बताया कि इस अनावेदक की लगभग 10 एकड़ जमीन है 50-60 हजार रूपया महिना कमाता है। अतः अनावेदक इतने कम मुआवजे के लिए तैयार नही है। वह सभी अनावेदक के खिलाफ पुलिस में कार्यवाही चाहती है। क्योंकि अनावेदक पति अनावेदिका किन्नर के साथ अवैध संबंध में रहता हैं इसलिये एस.पी. मुंगेली के माध्यम से अनावेदकगणों की उपस्थिति का आदेश आयोग द्वारा दिया गया। एक अन्य प्रकरण में आयोग की समझाईश पर अनावेदक अपने दोनो बच्चों के लिए प्रतिमाह 04 हजार रूपये देने के लिए तैयार हुआ।

एक अन्य प्रकरण में आवेदिका और अनावेदक आपस में माता- पुत्र है। अनावेदक पुत्र से पूछे जाने पर उसने स्वीकारा की वह मजदूरी करता है। मकान 25 लाख का है। जिसका निर्माण आवेदिका ने किया है और जमीन भी आवेदिका की है। आयोग ने कहा ऐसी स्थिति में आवेदिका उस मकान में आजीवन रहेगी वह जिसे चाहे उसे मकान देने की अधिकारिता रखती है। इसके लिए आवेदिका गरियाबंद नगर पालिका में उस मकान में संयुक्त हिस्सेदार के रूप में अपना नाम दर्ज करा सकती है। इस हेतु सी.ई.ओ. नगर पालिका गरियाबंद को पत्र लिखा जायेगा। आवेदिका भी इस आधार पर संयुक्त हिस्सेदार के रूप में अपना नाम आवेदिका दर्ज करा सकती है। आयोग की समझाईश के बाद प्रकरण नस्तीबध्द किया गया।

एक अन्य प्रकरण मे आवेदिका ने बताया कि आवेदिका व अनावेदक क्र. 1 पति-पत्नि है। अन्य महिला आवेदिका के पति की अवैधानिक पत्नि है। और उसके कारण आवेदिका से मारपीट करता है। और अनावेदिका 2 (अन्य महिला) के भड़काने पर आवेदिका से दुव्र्यवहार करता है। दोनो के व्हाट्सएप चैट का स्क्रीनशार्ट निकालकर अभिलेख में रखा गया है। इसके आधार पर प्रमाणित होता है कि अनावेदक 1 व 2 अवैध संबंध में रह रहे है और आवेदिका को प्रताड़ित कर रहे है। आज आवेदिका ने आयोग के समक्ष मांग रखा कि वह मकान में दोनो बच्चों के साथ रहना चाहती है। अनावेदक(पति) आवेदिका व दोनो बच्चों के साथ रहने का प्रयास ना करें जीवन में दखलंदाजी ना करें अनावेदक (पति) शासकीय सेवा में होते हुए और अपनी पत्नी से तलाक लिए बगैर अनावेदक 2 के साथ अवैध संबंध में रहकर सिविल सेवा का उल्लंघन कर रहा है जो कि अनावेदक को उसके शासकीय सेवा से निलंबित करने का पर्याप्त आधार है। महिला आयोग अनावेदक क्र. 1 के निलंबन की अनुशंसा करती है। क् इस आशय का पत्र आयोग द्वारा जिला शिक्षा अधिकारी धमतरी को दिया जायेगा। अनावेदिका क्र. 2(अन्य महिला) आवेदिका का घर तोड़ने के लिए जिम्मेदार है। उसके पास रहने का स्थान नही है। इस हेतु अनावेदक क्र 2 को नारी निकेतन भेजने की अनुशंसा आयोग द्वारा किया गया। इस निर्देश के साथ प्रकरण नस्तीबद्ध किया जाता है।

एक प्रकरण में आवेदिका ने बताया कि आवेदिका का पति 3 वर्ष से फरार है और आवेदिका के संपर्क में नही है। अनावेदकगणों ने ढुंढने का प्रयास भी नही किया आवेदिका के पति के द्वारा बनाये गये मकान को 15 लाख में अनावेदकगणों ने बेच दिया है और आवेदिका को कोई हिस्सा नही दिया है। अनावेदक ने बताया कि गांव में डेढ़ एकड़ जमीन है। आवेदिका अपने बच्चों का हक का बंटवारा के लिए न्यायालय में आवेदन लगा सकती है। इस स्तर पर प्रकरण नस्तीबद्ध किया जाता है।

एक अन्य प्रकरण में अनावेदिका का ईलाज तांत्रिक से किया गया था और अनावेदिका को परेशान करने वाली का नाम आवेदिका का बताया गया था कि आवेदिका के टोना करने से अनावेदिका की तबियत खराब हुई है। इसका वीडियों तांत्रिक ने बनाया और सोशल मीडिया में डालकर वायरल भी किया था। जिससे पूरे परिवार समाज मे आवेदिका की छवि धुमिल हुई। आयोग ने कहा कि इस मामले में आवेदिका अनावेदकगणों के खिलाफ मानहानि का आपराधिक और कानूनी मामला दायर कर सकती है। इस बात का पता चलते ही अनावेदकगणों ने आयोग के समक्ष माफी मांगी और कहा कि जानबूझ कर आवेदिका को प्रताड़ित करने की उनकी मंशा नहीं थी। ऐसी दशा में आयोग द्वारा समझाईश दिया गया कि कोई भी अनावेदकगण आवेदिका के खिलाफ इस तरह की प्रताड़ना नहीं करेंगे और जिस तांत्रिक ने यह वीडियों जारी किया था उसका नाम, पता व मो.नं. देने पर साइबर थाना में उसके खिलाफ केस दर्ज कराने मे सहयोग करेंगे। इस निर्देश के साथ प्रकरण नस्तीबध्द किया गया।