कैच द रेन अभियान में छत्तीसगढ़ का जलवा, जल संचय जन भागीदारी में देशभर में हासिल किया पहला स्थान

Follow Us

रायपुर। जल संचय जन भागीदारी और कैच द रेन अभियान में छत्तीसगढ़ ने देशभर में शानदार प्रदर्शन किया है। सूरजपुर, महासमुंद, बालोद, बलौदाबाजार-भाटापारा और कबीरधाम को देश के शीर्ष 10 जिलों में जगह मिली है। वहीं जल संरक्षण के लिए प्रदेश में हजारों जल संरचनाएं तैयार की गई हैं। नई दिल्ली में आयोजित जल शक्ति मंत्रालय के विभागीय शिखर सम्मेलन में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रधानमंत्री के सामने छत्तीसगढ़ में जल संरक्षण के लिए किए जा रहे नवाचारों और जनभागीदारी आधारित प्रयासों की जानकारी साझा की। सम्मेलन के कैच द रेन सत्र में उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने वर्षा जल संचयन, भू-जल पुनर्भरण और पेयजल स्रोतों के संरक्षण को लेकर प्रदेश में किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में जल संरक्षण को केवल सरकारी योजनाओं या जल संरचनाओं के निर्माण तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि किसानों, ग्राम पंचायतों, जल सखियों, जल मित्रों और स्थानीय समुदायों को जोड़कर इसे जनअभियान का रूप दिया गया है। उन्होंने कोरिया जिले से शुरू हुए 5 प्रतिशत मॉडल का भी विशेष उल्लेख किया, जिसमें किसान अपनी कृषि भूमि का लगभग 5 प्रतिशत हिस्सा भू-जल पुनर्भरण और वर्षा जल संचयन के लिए स्वेच्छा से उपलब्ध करा रहे हैं। इस पहल के तहत ऐसी संरचनाएं तैयार की जा रही हैं, जिससे बारिश का पानी खेतों से बाहर बहने के बजाय वहीं रुककर धीरे-धीरे जमीन में समाहित हो सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसान के लिए पानी उसकी फसल, परिवार, आजीविका और भविष्य से सीधे जुड़ा विषय है, इसलिए प्रदेश में जल संरक्षण की योजनाओं के केंद्र में किसान और गांव को रखा गया है।

कोरबा में भारी बारिश का असर, मिनीमाता बांगो बांध के 5 गेट खुले; हसदेव नदी में 26 हजार क्यूसेक से ज्यादा पानी छोड़ा गया

जल संचय जन भागीदारी अभियान के पहले चरण जेएसजेबी 1.0 में छत्तीसगढ़ में 4 लाख 5 हजार 561 जल संरचनाएं बनाई गईं और प्रदेश देश में दूसरे स्थान पर रहा। दूसरे चरण जेएसजेबी 2.0 में 24 लाख 7 हजार 456 जल संरचनाएं दर्ज की गईं, जिनमें 23 लाख 7 हजार 768 का कार्य पूरा हो चुका है। अब तीसरे चरण जेएसजेबी 3.0 में छत्तीसगढ़ ने देश में पहला स्थान हासिल किया है। इस चरण में 79 हजार 775 जल संरचनाएं दर्ज की गई हैं, जिनमें से 77 हजार 719 का कार्य पूर्ण हो चुका है। जियो-टैगिंग, नियमित मॉनिटरिंग और प्रगति की समीक्षा के साथ जल सखी, जल मित्र, किसान और पंचायत प्रतिनिधि इस अभियान को गांव-गांव आगे बढ़ा रहे हैं। कैच द रेन अभियान के तहत प्रदेश की भौगोलिक परिस्थितियों के अनुसार वर्षा जल संचयन और भू-जल पुनर्भरण की संरचनाएं विकसित की जा रही हैं। इसके परिणामस्वरूप पानी की कमी वाले ब्लॉकों की संख्या 26 से घटकर 19 रह गई है और पांच क्रिटिकल ब्लॉकों के सामान्य श्रेणी में आने का अनुमान है।