नई दिल्ली । जिस उम्र में ज्यादातर लोग अपनी रफ्तार धीमी कर देते हैं, उस उम्र में विजयवाड़ा, आंध्र प्रदेश के लिंगम रविंद्र राव लगातार अपनी शारीरिक सीमाओं को चुनौती दे रहे हैं। 72 वर्ष, एक महीने और 13 दिन की उम्र में उन्होंने 14 अगस्त को 5,642 मीटर ऊंचे माउंट एल्ब्रुस के वेस्ट पीक पर सफलतापूर्वक चढ़ाई पूरी की। उनकी यह उपलब्धि बताती है कि उम्र किसी के जुनून और हौसले की सीमा तय नहीं करती।उपलब्ध जानकारी के अनुसार, रविंद्र राव माउंट एल्ब्रुस पर चढऩे वाले सबसे उम्रदराज भारतीय हैं। उनकी उपलब्धि सिर्फ पर्वत की ऊंचाई की वजह से खास नहीं है, बल्कि 72 वर्ष की उम्र में इतनी चुनौतीपूर्ण चढ़ाई पूरी करना इसे और असाधारण बनाता है।
हालांकि, रविंद्र राव का माउंट एल्ब्रुस तक पहुंचने का सफर उनके 70वें दशक में शुरू नहीं हुआ। शारीरिक गतिविधियों और फिटनेस के प्रति उनका जुनून छात्र जीवन से ही रहा है। 1972 में 18 साल की उम्र में, ढ्ढढ्ढञ्ज खडग़पुर में पढ़ाई के दौरान उन्होंने दोस्तों के साथ खडग़पुर से दार्जिलिंग तक साइकिल यात्रा की थी। इस दौरान उन्होंने महज 10 दिनों में करीब 1,700 किलोमीटर की दूरी तय की। बाद में पेशेवर करियर और कारोबारी जिम्मेदारियां उनकी प्राथमिकता बन गईं, लेकिन उन्होंने फिटनेस से अपना जुड़ाव कभी पूरी तरह नहीं छोड़ा।
वह खेलों से जुड़े रहे और सक्रिय जीवनशैली बनाए रखी। समय के साथ उन्होंने फिर एडवेंचर गतिविधियों की ओर रुख किया और पर्वतारोहण को अपनी यात्रा का हिस्सा बनाया। उनकी हालिया उपलब्धियों में 2024 में *माउंट किलिमंजारो* और *माउंट लोबुचे* पर चढ़ाई शामिल है। अब माउंट एल्ब्रुस उनकी इस यात्रा में एक और महत्वपूर्ण पड़ाव बन गया है। यह उपलब्धि उन्हें उनके अगले बड़े लक्ष्य सेवन समिट्स के और करीब ले जाती है, जिसमें दुनिया के सातों महाद्वीपों की सबसे ऊंची चोटियों को फतह करना शामिल है।
अब जब माउंट एल्ब्रुस भी उनके सफर का हिस्सा बन चुका है, रविंद्र राव का अगला लक्ष्य साफ है—सेवन समिट्स की अपनी यात्रा को आगे बढ़ाना और अपने पोते अनुराग के साथ नई चोटियों को फतह करना। उनका सफर इस बात की मिसाल है कि खुद को चुनौती देने, फिट रहने और नई ऊंचाइयों को छूने की कोई उम्र सीमा नहीं होती।
