नई दिल्ली। केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि (पीएम स्वनिधि) योजना रेहड़ी-पटरी वालों और छोटे दुकानदारों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ी पहल साबित हो रही है। इस योजना के तहत सरकार न केवल लाभार्थियों को बिना किसी गारंटी के लोन उपलब्ध कराती है, बल्कि अब उन्हें डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने के लिए यूपीआई-लिंक्ड रुपे क्रेडिट कार्ड की सुविधा भी दी जा रही है।
बिना गारंटी के मिलता है 50 हजार तक का लोन
पीएम स्वनिधि योजना विशेष रूप से स्ट्रीट वेंडर्स के लिए डिज़ाइन की गई है। इसके तहत लाभार्थियों को तीन अलग-अलग चरणों में क्रमश: 15,000 रुपये, 25,000 रुपये और 50,000 रुपये तक का लोन बिना किसी गारंटी (कोलैटरल-फ्री) के मुहैया कराया जाता है। यह लोन छोटे व्यापारियों को अपना व्यवसाय दोबारा शुरू करने या उसे बढ़ाने में बड़ी आर्थिक मदद देता है।
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किसे मिलेगा 30,000 रुपये लिमिट वाला क्रेडिट कार्ड?
क्रेडिट कार्ड की इस विशेष सुविधा का लाभ उन स्ट्रीट वेंडर्स को मिलता है, जिन्होंने योजना के तहत अपने दूसरे चरण का लोन सफलतापूर्वक चुका दिया है और अब वे तीसरे चरण के लोन (50 हजार रुपये) के लिए पात्र हैं या उसे ले चुके हैं। जिन लोगों ने तीसरे चरण का लोन भी पूरा चुका दिया है, वे भी इस क्रेडिट कार्ड के लिए आवेदन कर सकते हैं। पात्र लाभार्थियों को 30,000 रुपये तक की लिमिट वाला यूपीआई-लिंक्ड रुपे क्रेडिट कार्ड जारी किया जाता है। खास बात यह है कि बिल का समय पर भुगतान करने पर लाभार्थी 20 से 50 दिनों तक इस क्रेडिट कार्ड का बिना किसी ब्याज (इंटरेस्ट-फ्री) के इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके अलावा, डिजिटल ट्रांजैक्शन को बढ़ावा देने के लिए वेंडर्स को सालाना 1,600 रुपये तक का कैशबैक भी दिया जाता है।
आवेदन के लिए जरूरी दस्तावेज और शर्तें
इस योजना का लाभ उठाने के लिए आवेदक की उम्र 21 से 65 वर्ष के बीच होनी चाहिए और उसका किसी भी बैंक में एनपीए (डिफॉल्टर) या बट्टे खाते वाला अकाउंट नहीं होना चाहिए। आवेदन के लिए आधार कार्ड, पैन कार्ड, वेंडिंग सर्टिफिकेट (कोविड), शहरी स्थानीय निकाय द्वारा जारी पहचान पत्र या सिफारिश पत्र , बचत बैंक खाते का विवरण और पते के प्रमाण की आवश्यकता होती है। इसके अलावा, बैंकों को निर्देश दिए गए हैं कि क्रेडिट कार्ड जारी करते समय ग्राहक की सहमति से बिल भुगतान के लिए ऑटो-डेबिट सुविधा डिफॉल्ट रूप से एक्टिव कर दी जाए, ताकि समय पर भुगतान हो सके और लाभार्थी का क्रेडिट स्कोर बेहतर बना रहे।
