नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने मेटा विवाद के बीच केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा है। केजरीवाल ने आरोप लगाया कि सरकार ऐसे कानूनी प्रावधानों की दिशा में आगे बढ़ रही है, जिनका मकसद प्रधानमंत्री और सरकार को जनता की जवाबदेही से बचाना है। केजरीवाल ने कहा कि लोकतंत्र में सरकार और शीर्ष पदों पर बैठे लोगों को कानून के दायरे में रहकर जवाब देना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि नए कानूनी प्रावधान नागरिकों के अधिकारों और लोकतांत्रिक जवाबदेही को प्रभावित कर सकते हैं।
AAP प्रमुख ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए दावा किया कि सरकार की नीतियों को लेकर जनता में असंतोष बढ़ रहा है। उन्होंने पेपर लीक और E20 पेट्रोल नीति जैसे मुद्दों का जिक्र करते हुए कहा कि इन मामलों का असर सरकार के समर्थक वर्ग पर भी पड़ा है। केजरीवाल ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री अब अपने ही नागरिकों से बचने के लिए कानून बनाने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि केंद्र सरकार की ओर से इन आरोपों पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं, दूसरी ओर मेटा और भारत सरकार के बीच हालिया बैठक भी चर्चा में है। सूत्रों के अनुसार, मेटा के सीईओ मार्क जुकरबर्ग ने बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कंटेंट, डीपफेक सामग्री और प्लेटफॉर्म संचालन में हुई कुछ चूकों को लेकर सरकार के सामने खेद जताया है।
बैठक में सरकार ने मेटा को प्लेटफॉर्म के कंटेंट मॉडरेशन और एल्गोरिदम की भूमिका को लेकर अपनी चिंताएं बताईं। सरकार का कहना है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म केवल निष्क्रिय मध्यस्थ नहीं हैं, बल्कि कंटेंट के प्रसार में उनकी सक्रिय भूमिका होती है। मेटा के प्रतिनिधिमंडल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़े एक फेसबुक वीडियो को अस्थायी रूप से हटाए जाने के मामले पर भी स्पष्टीकरण दिया। कंपनी ने इसे तकनीकी या संचालन संबंधी गलती बताया है।
