देशभर में इन दिनों एनालॉग पनीर को लेकर चर्चा तेज है। छत्तीसगढ़ में इसके उपयोग और बिक्री पर सख्ती के बाद लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि आखिर एनालॉग पनीर क्या है और क्या यह स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित है। विशेषज्ञों के अनुसार एनालॉग पनीर नकली पनीर नहीं होता। यदि इसे खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुरूप तैयार किया गया हो और पैकेजिंग पर इसकी सही जानकारी दी गई हो, तो यह वैध उत्पाद है। हालांकि इसे दूध से बने असली पनीर के नाम पर बेचना उपभोक्ताओं के साथ धोखाधड़ी माना जाएगा।
विशेषज्ञ बताते हैं कि पारंपरिक पनीर ताजे दूध से तैयार किया जाता है, जबकि एनालॉग पनीर में वनस्पति तेल, स्टार्च, मिल्क पाउडर, इमल्सीफायर और अन्य स्वीकृत खाद्य सामग्री का उपयोग किया जाता है। इसकी लागत कम होने के कारण होटल, रेस्तरां और फास्ट फूड उद्योग में इसका इस्तेमाल अधिक होता है, लेकिन पोषण के मामले में यह असली पनीर का विकल्प नहीं माना जाता।
खरीदारी के समय उपभोक्ताओं को पैकेट पर “Analog Paneer”, “Vegetable Fat” या “Dairy Whitener Base” जैसे शब्दों पर विशेष ध्यान देना चाहिए। वहीं असली पनीर के लेबल में मुख्य सामग्री के रूप में दूध का उल्लेख होता है। बनावट के आधार पर भी दोनों में अंतर पहचाना जा सकता है। असली पनीर मुलायम और हल्का दानेदार होता है, जबकि एनालॉग पनीर अधिक चिकना या रबड़ जैसा महसूस हो सकता है।
खाद्य विशेषज्ञों का कहना है कि पैकेज्ड उत्पाद खरीदते समय लेबल, सामग्री सूची और निर्माता की जानकारी जरूर जांचें। यदि खुला पनीर खरीद रहे हैं तो केवल विश्वसनीय डेयरी या विक्रेता से ही खरीदें। जागरूकता और सही जानकारी ही उपभोक्ताओं को बेहतर गुणवत्ता वाला और सुरक्षित उत्पाद चुनने में मदद कर सकती है।
