फौजी भाइयों के लिए खास राखी बना रहीं चांपा की बहन, मिट्टी-गोबर और बीज से दे रहीं प्रकृति का संदेश

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जांजगीर-चांपा। रक्षाबंधन को लेकर जहां बाजारों में रंग-बिरंगी राखियों की रौनक है, वहीं चांपा की एक महिला देश की सीमा पर तैनात फौजी भाइयों के लिए खास राखियां तैयार कर रही हैं। इन राखियों की खासियत यह है कि इन्हें रेशमी धागे के साथ मिट्टी, गोबर और बीजों से तैयार किया जा रहा है। साथ ही जवानों के लिए तिलक में इस्तेमाल करने मिट्टी भी भेजने की तैयारी की जा रही है। चांपा निवासी नेहा अविनाश अग्रवाल पिछले चार वर्षों से अपने बच्चों और सहेलियों के साथ मिलकर सीमा पर तैनात सैनिकों के लिए राखियां बना रही हैं। नेहा मारवाड़ी महिला समिति के माध्यम से सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय रहती हैं।

नेहा और उनकी टीम इन राखियों को तिरंगे रंग की पट्टी, मिट्टी, गोबर और अलग-अलग फल-फूलों के बीजों से सजाती हैं। राखियों को भारत के नक्शे का आकार देकर तैयार किया जाता है, ताकि इसमें देशभक्ति के साथ प्रकृति संरक्षण का संदेश भी जुड़ा रहे। नेहा का कहना है कि देश की रक्षा में तैनात जवान त्योहारों पर भी अक्सर अपने परिवार से दूर रहते हैं। ऐसे में उनकी कलाई पर राखी बांधकर बहन के प्यार का एहसास पहुंचाने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश देना उनका उद्देश्य है।

इन राखियों में नींबू, संतरा, पीपल, बरगद, नीम, तुलसी और गेंदा जैसे पौधों के बीज डाले गए हैं। राखी खोलने के बाद इन बीजों को गमले में लगाकर पानी देने पर पौधे उग सकेंगे। नेहा का कहना है कि घर में आने वाले फलों और फूलों के बीजों को वह फेंकने के बजाय एकत्र करती हैं और उनका उपयोग इन राखियों में करती हैं। इस अनोखी पहल के जरिए नेहा न सिर्फ फौजी भाइयों तक बहनों का प्यार पहुंचा रही हैं, बल्कि हरियाली और पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दे रही हैं।