नई दिल्ली। बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने नई दिल्ली स्थित फॉरेन कॉरेस्पोंडेंट्स क्लब से वर्चुअल माध्यम से एक भावुक और राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण संबोधन दिया। अपने संबोधन की शुरुआत करते ही वह भावुक हो गईं और अपने आंसू नहीं रोक सकीं। उन्होंने कहा कि आज वह केवल बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री के रूप में नहीं, बल्कि राष्ट्रपिता बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान की बेटी के रूप में दुनिया से बात कर रही हैं। उन्होंने अपने परिवार के उन सदस्यों को याद किया, जिनकी 1975 में ढाका में शेख मुजीबुर रहमान के साथ हत्या कर दी गई थी। इस दौरान उन्होंने कहा कि इतिहास की उन दर्दनाक घटनाओं ने उनके जीवन को हमेशा के लिए बदल दिया, लेकिन देश और लोकतंत्र के प्रति उनकी प्रतिबद्धता कभी कम नहीं हुई।
अपने संबोधन में शेख हसीना ने वर्ष 2024 में बांग्लादेश में हुए छात्र आंदोलन और उसके बाद हुए सत्ता परिवर्तन को लेकर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि जिस आंदोलन को पूरी दुनिया छात्र आंदोलन के रूप में देख रही थी, वह वास्तव में एक सुनियोजित राजनीतिक साजिश थी। उनके अनुसार, आंदोलन की शुरुआत भले ही कोटा सुधार जैसे मुद्दे से हुई हो, लेकिन जल्द ही कुछ संगठित समूहों ने इसे सरकार को गिराने के अभियान में बदल दिया। उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों से वह अपने देश को लगातार परिस्थितियों से गुजरते हुए देख रही हैं। उनके शब्दों में, “यह वह बांग्लादेश नहीं है जिसे हमने बनाया था और न ही वह देश है जिसके लिए 1971 के मुक्ति संग्राम में 30 लाख लोगों ने अपने प्राण न्योछावर किए थे।” उन्होंने कहा कि आज देश जिस दिशा में जा रहा है, वह उनके लिए अत्यंत पीड़ादायक है।
शेख हसीना ने कहा कि जुलाई और अगस्त 2024 की घटनाओं को लेकर कई तरह की बातें कही गईं, लेकिन वास्तविकता इससे अलग थी। उन्होंने दावा किया कि उनकी सरकार ने शुरुआत से ही छात्रों की मांगों को गंभीरता से लिया था। सरकार ने बातचीत, कानूनी प्रक्रिया और शांतिपूर्ण समाधान के माध्यम से विवाद समाप्त करने का प्रयास किया। इसके बावजूद कुछ संगठनों ने छात्रों के असंतोष का उपयोग अपने राजनीतिक उद्देश्य पूरे करने के लिए किया। पूर्व प्रधानमंत्री ने आरोप लगाया कि आंदोलन में शामिल वास्तविक छात्रों का इस्तेमाल किया गया और उन्हें गुमराह किया गया। उनके अनुसार, आंदोलन का मूल उद्देश्य कोटा प्रणाली में सुधार नहीं था, बल्कि लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई सरकार को हटाना था। उन्होंने कहा कि कुछ समूहों ने योजनाबद्ध तरीके से लोगों को सरकार के खिलाफ भड़काया और देश में अस्थिरता का माहौल बनाया।
शेख हसीना ने यह भी कहा कि वह आज अपने देश से दूर हैं, लेकिन उनके दिल और भावनाएं हमेशा बांग्लादेश के लोगों के साथ हैं। उन्होंने कहा कि उनका परिवार और उन्होंने स्वयं बांग्लादेश की स्वतंत्रता, विकास और लोकतंत्र के लिए लंबा संघर्ष किया है। इसलिए देश की वर्तमान परिस्थितियां उन्हें गहरा दुख पहुंचाती हैं। उन्होंने कहा कि वह भौगोलिक रूप से भले ही अपने देश में नहीं हैं, लेकिन मानसिक और भावनात्मक रूप से हमेशा अपने लोगों के साथ खड़ी हैं। अपने संबोधन में उन्होंने 2024 की घटनाओं को लेकर फैलाए गए कथित प्रचार पर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि उस समय देश और विदेश में कई तरह की भ्रामक जानकारियां फैलाई गईं, जिससे आंदोलन की वास्तविक तस्वीर दुनिया के सामने नहीं आ सकी। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि जुलाई 2024 की घटनाओं की सच्चाई सामने लाई जाए और लोगों को बताया जाए कि वास्तव में क्या हुआ था। दिल्ली के फॉरेन कॉरेस्पोंडेंट्स क्लब से प्रसारित इस वर्चुअल कार्यक्रम में शेख हसीना का चेहरा नहीं दिखाया गया।
कार्यक्रम के दौरान केवल उनकी आवाज का सीधा प्रसारण किया गया। इसके बावजूद उनके भावुक शब्दों और आरोपों ने कार्यक्रम को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना दिया। उन्होंने यह भी कहा कि लोकतंत्र केवल चुनाव जीतने का नाम नहीं है, बल्कि जनता के अधिकारों और संवैधानिक संस्थाओं की रक्षा करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। उनके अनुसार, यदि किसी लोकतांत्रिक सरकार को संगठित राजनीतिक रणनीति और हिंसा के माध्यम से हटाया जाता है तो उसका असर केवल एक सरकार पर नहीं, बल्कि पूरे लोकतांत्रिक ढांचे पर पड़ता है।
हालांकि, शेख हसीना द्वारा लगाए गए आरोपों पर बांग्लादेश के वर्तमान सत्ता पक्ष या आंदोलन से जुड़े अन्य पक्षों की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। उनके दावों की स्वतंत्र पुष्टि भी नहीं हुई है। बांग्लादेश में 2024 के घटनाक्रम को लेकर अलग-अलग राजनीतिक दलों, मानवाधिकार संगठनों और विश्लेषकों की अलग-अलग राय रही है। ऐसे में इन आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष संबंधित जांच और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर ही तय होगा। शेख हसीना का यह संबोधन ऐसे समय आया है जब बांग्लादेश की राजनीति अब भी 2024 के घटनाक्रम के प्रभाव से उबरने की कोशिश कर रही है। उनके बयान ने एक बार फिर उस दौर की घटनाओं और सत्ता परिवर्तन को लेकर नई बहस छेड़ दी है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि उनके आरोपों पर बांग्लादेश की मौजूदा सरकार, विपक्ष और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की क्या प्रतिक्रिया सामने आती है।
