नई दिल्ली। शहरों में बढ़ते कंक्रीट के जंगलों के बीच कबूतरों का घरों की बालकनी, छत या खिड़कियों पर आकर घोंसला बनाना आम बात हो गई है। कई लोग इसे शुभ संकेत मानते हैं, जबकि कुछ लोग सफाई और स्वास्थ्य कारणों से परेशान भी रहते हैं। वास्तु शास्त्र और धार्मिक मान्यताओं में कबूतर के घर आने को लेकर अलग-अलग मान्यताएं मिलती हैं।
सनातन परंपरा में कबूतर को शांति, सकारात्मकता और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि यदि कबूतर घर के आसपास आकर शांतिपूर्वक दाना चुगते हैं या निवास करते हैं, तो यह घर में सुख-शांति और खुशहाली का संकेत हो सकता है। कुछ धार्मिक ग्रंथों में भी कपोत (कबूतर) के आगमन को शुभ संकेतों से जोड़ा गया है।
वास्तु मान्यताओं के अनुसार, सुबह के समय कबूतरों की आवाज को सकारात्मक ऊर्जा से जोड़कर देखा जाता है। माना जाता है कि इससे घर का वातावरण शांत और सौहार्दपूर्ण बना रहता है। हालांकि, घोंसला बनने के बाद साफ-सफाई का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। ज्यादा गंदगी या पक्षियों की बीट से स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए धार्मिक आस्था के साथ स्वच्छता और सुरक्षा का संतुलन बनाए रखना बेहतर है।
