नई दिल्ली। भारत के पश्चिमी तट पर बसा गुजरात अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, ऐतिहासिक धरोहरों, प्राकृतिक सुंदरता और आर्थिक विकास के कारण देश के सबसे खास राज्यों में गिना जाता है। महात्मा गांधी और सरदार वल्लभभाई पटेल की जन्मभूमि होने के साथ-साथ इसे ‘ज्वैल ऑफ वेस्टर्न इंडिया’ यानी पश्चिमी भारत का गहना भी कहा जाता है। अपनी अनूठी परंपराओं, विश्वस्तरीय पर्यटन स्थलों और व्यापारिक महत्व के कारण गुजरात देश-विदेश के पर्यटकों को आकर्षित करता है।
गुजरात ऐतिहासिक रूप से व्यापार और उद्योग का प्रमुख केंद्र रहा है। गुजराती समुदाय अपनी व्यावसायिक समझ और उद्यमशीलता के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। पेट्रोकेमिकल्स, फार्मास्यूटिकल्स, ऑटोमोबाइल और टेक्सटाइल उद्योगों में गुजरात की मजबूत पहचान है। वहीं, सूरत शहर हीरों की कटिंग और पॉलिशिंग के लिए विश्वभर में जाना जाता है, जिसके कारण इसे ‘डायमंड सिटी’ भी कहा जाता है।
राज्य की सबसे बड़ी भौगोलिक विशेषता इसकी लगभग 1,600 किलोमीटर लंबी समुद्री तटरेखा है, जो भारत में सबसे लंबी मानी जाती है। गुजरात में करीब 41 बंदरगाह हैं, जिनमें कांडला और मुंद्रा पोर्ट देश के अंतरराष्ट्रीय व्यापार की रीढ़ माने जाते हैं। यही वजह है कि भारत के समुद्री व्यापार में गुजरात की अहम भूमिका है।
प्राकृतिक सौंदर्य और वन्यजीवन की बात करें तो गुजरात का गिर राष्ट्रीय उद्यान पूरी दुनिया में एशियाई शेरों का एकमात्र प्राकृतिक आवास है। यहां हर साल लाखों पर्यटक जंगल सफारी का आनंद लेने और दुर्लभ एशियाई शेरों को देखने पहुंचते हैं।
गुजरात अपनी ऐतिहासिक और धार्मिक धरोहरों के लिए भी प्रसिद्ध है। पाटन की विश्व धरोहर ‘रानी की वाव’, मोढेरा का भव्य सूर्य मंदिर और प्रभास पाटन स्थित प्रसिद्ध सोमनाथ मंदिर अपनी अद्भुत वास्तुकला और बारीक नक्काशी के लिए दुनियाभर में मशहूर हैं। इन स्मारकों की कलात्मक शैली भारतीय स्थापत्य कला का उत्कृष्ट उदाहरण मानी जाती है।
दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ भी गुजरात के केवड़िया में स्थित है। लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल को समर्पित यह प्रतिमा 182 मीटर ऊंची है और देश-विदेश से लाखों पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती है।
गुजरात की सांस्कृतिक पहचान भी बेहद समृद्ध है। यहां का नवरात्रि महोत्सव पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है, जहां नौ दिनों तक गरबा और डांडिया-रास की रंगारंग प्रस्तुतियां होती हैं। हर साल देश-विदेश से हजारों लोग इस उत्सव का हिस्सा बनने गुजरात पहुंचते हैं।
कच्छ का रण उत्सव भी राज्य के प्रमुख पर्यटन आयोजनों में शामिल है। सफेद रेगिस्तान में आयोजित होने वाला यह उत्सव संगीत, लोककला, हस्तशिल्प और गुजराती संस्कृति का अनूठा संगम प्रस्तुत करता है। इसके अलावा पाटन का प्रसिद्ध पटोला, बांधनी, कच्छी कढ़ाई और लकड़ी के हस्तशिल्प गुजरात की पारंपरिक कला को वैश्विक पहचान दिलाते हैं। खासतौर पर पाटन का हस्तनिर्मित पटोला अपनी उत्कृष्ट बुनाई के कारण लाखों रुपये की कीमत पर खरीदा जाता है।
गुजराती खान-पान भी अपनी अलग पहचान रखता है। ढोकला, खांडवी, थेपला, फाफड़ा-जलेबी, खमन, ऊंधियू और पारंपरिक गुजराती थाली का स्वाद देश-विदेश के लोगों को बेहद पसंद आता है। यही विविधता, समृद्ध विरासत, सांस्कृतिक रंग, ऐतिहासिक धरोहर और आर्थिक मजबूती गुजरात को वास्तव में ‘पश्चिमी भारत का गहना’ बनाती है।
