CAG रिपोर्ट में छत्तीसगढ़ की पंचायत व्यवस्था पर सवाल, 61% पद खाली और ₹3,243 करोड़ की फंड कटौती का दावा

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रायपुर। भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की हालिया रिपोर्ट में छत्तीसगढ़ की पंचायती राज व्यवस्था और स्थानीय निकायों के वित्तीय एवं प्रशासनिक प्रबंधन को लेकर कई गंभीर टिप्पणियां की गई हैं। रिपोर्ट में पंचायतों में कर्मचारियों की भारी कमी, वित्तीय संसाधनों के आवंटन और विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में खामियों की ओर ध्यान आकर्षित किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश की पंचायतों में स्वीकृत पदों में से करीब 61 प्रतिशत पद रिक्त हैं, जिससे स्थानीय प्रशासन और विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं। CAG ने यह भी कहा है कि स्थानीय निकायों को उनके निर्धारित हिस्से से 3,243 करोड़ रुपये कम राशि उपलब्ध कराई गई।

ऑडिट में यह भी सामने आया कि ई-ग्राम स्वराज पोर्टल लागू होने के बावजूद कई पंचायतों में अब भी मैनुअल तरीके से लेखा-जोखा रखा जा रहा है, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल उठते हैं। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि वर्ष 2018 से 2023 के बीच जिला योजना समितियों की बैठकें आयोजित नहीं की गईं। नियमों के अनुसार इन समितियों की नियमित बैठकें स्थानीय विकास योजनाओं के निर्माण और समन्वय के लिए आवश्यक हैं। CAG की रिपोर्ट ने प्रदेश में पंचायत प्रशासन, वित्तीय प्रबंधन और विकास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर नई बहस छेड़ दी है।