जगदलपुर। अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावे को लेकर हुई चर्चाओं के बीच अब छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध मां दंतेश्वरी मंदिर के चढ़ावे और आभूषणों के रिकॉर्ड को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। मंदिर के मुख्य पुजारी ने दावा किया है कि वर्षों से जमा चढ़ावे और सोने-चांदी के आभूषणों का पूरा विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया है। साथ ही इस संबंध में की गई शिकायत की जांच भी वर्षों बाद तक पूरी नहीं हो सकी है। अब मंदिर के खजाने का पारदर्शी सत्यापन और रिकॉर्ड सार्वजनिक करने की मांग तेज हो गई है।
जानकारी के अनुसार, बस्तर रियासतकालीन परंपरा से जुड़े मां दंतेश्वरी मंदिर सहित कुल 22 मंदिरों का संचालन टेंपल कमिटी के माध्यम से किया जाता है। इन मंदिरों में हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु नकद राशि, सोने-चांदी के आभूषण, छत्र और अन्य मूल्यवान चढ़ावे अर्पित करते हैं। मां दंतेश्वरी मंदिर के मुख्य पुजारी कृष्ण कुमार का कहना है कि वर्षों से एकत्र हो रहे आभूषणों का विस्तृत रिकॉर्ड सार्वजनिक नहीं किया गया है। उनका आरोप है कि रिकॉर्ड केवल वजन तक सीमित है, जबकि आभूषणों की गुणवत्ता, शुद्धता और वास्तविक स्थिति का नियमित सत्यापन नहीं किया जाता। उन्होंने यह भी कहा कि वर्ष 2020 में मंदिर के खजाने के सत्यापन के निर्देश दिए गए थे, लेकिन उनका पालन नहीं किया गया।
मां दंतेश्वरी मंदिर बस्तर की आस्था का प्रमुख केंद्र होने के साथ-साथ टेंपल कमिटी की गतिविधियों का भी महत्वपूर्ण आधार माना जाता है। मंदिरों के रखरखाव और धार्मिक आयोजनों पर हर वर्ष बड़ी राशि खर्च की जाती है। ऐसे में श्रद्धालुओं और मंदिर से जुड़े लोगों का कहना है कि चढ़ावे, आभूषणों और मंदिर के खजाने का नियमित ऑडिट तथा सार्वजनिक रिकॉर्ड व्यवस्था लागू की जानी चाहिए। मंदिर से जुड़े जानकारों का मानना है कि पारदर्शी व्यवस्था लागू होने से श्रद्धालुओं का विश्वास और मजबूत होगा तथा वर्षों से लंबित शिकायतों की स्थिति भी स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल इस मामले को लेकर पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग लगातार उठ रही है।
