सोयाबीन की बंपर पैदावार के लिए कृषि विश्वविद्यालय की सलाह, कतार बोनी और बीजोपचार अपनाएं किसान

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रायपुर। छत्तीसगढ़ के किसानों को सोयाबीन की बेहतर पैदावार दिलाने के उद्देश्य से इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर ने राज्य स्तरीय कृषि निर्देशिका जारी की है। विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने मौसम को अनुकूल बताते हुए किसानों को जल्द से जल्द वैज्ञानिक पद्धति से सोयाबीन की सीधी एवं कतार बोनी करने की सलाह दी है।

मौसम पूर्वानुमान के अनुसार प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में आगामी दिनों में हल्की से मध्यम बारिश और घने बादल रहने की संभावना है। इसे बोनी के लिए उपयुक्त समय बताते हुए वैज्ञानिकों ने किसानों से खेतों में बुवाई का कार्य शीघ्र पूरा करने की अपील की है।

विश्वविद्यालय के अनुसार, प्रति हेक्टेयर 65 से 75 किलोग्राम बीज का उपयोग सबसे उपयुक्त रहता है। बुवाई हमेशा कतारों में की जानी चाहिए, जिसमें कतार से कतार की दूरी 45 सेंटीमीटर और पौधे से पौधे की दूरी 7 से 10 सेंटीमीटर रखी जाए।

फसल को शुरुआती अवस्था में कीट एवं रोगों से सुरक्षित रखने के लिए बीजोपचार को अनिवार्य बताया गया है। किसानों को राइजोबियम कल्चर 5 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज तथा पीएसबी (फॉस्फेट सॉल्युबिलाइजिंग बैक्टीरिया) 10 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज की दर से उपचारित कर ही बुवाई करने की सलाह दी गई है।

संतुलित पोषण के लिए वैज्ञानिकों ने प्रति हेक्टेयर 20–25 किलोग्राम नत्रजन (नाइट्रोजन), 60–80 किलोग्राम स्फुर (फॉस्फोरस) तथा 30–40 किलोग्राम पोटाश के उपयोग की अनुशंसा की है। विश्वविद्यालय का कहना है कि इन वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाकर किसान सोयाबीन की उपज बढ़ाने के साथ बेहतर गुणवत्ता की फसल प्राप्त कर सकते हैं।