श्रीनगर/जम्मू। जम्मू-कश्मीर प्रशासन और कश्मीर यूनिवर्सिटी ने शैक्षणिक संस्थानों में उपलब्ध पुस्तकों की व्यापक समीक्षा के निर्देश जारी किए हैं। विभागाध्यक्षों, स्कूल प्राचार्यों और संबंधित संस्थानों से कहा गया है कि वे ऐसी किसी भी पुस्तक या सामग्री की पहचान करें जिसे प्रशासन की दृष्टि में “विवादास्पद” या “राष्ट्रीय हित के प्रतिकूल” माना जा सकता है। यह कदम हाल ही में सरकारी स्कूल की लाइब्रेरी के लिए खरीदी गई एक पुस्तक को वापस लिए जाने के बाद उठाया गया है। उस पुस्तक में कश्मीर को “भारत-अधिकृत कश्मीर” और “भारत-नियंत्रित कश्मीर” जैसे शब्दों से संबोधित किया गया था तथा प्रतिबंधित संगठन JKLF के संस्थापक मकबूल भट का उल्लेख विवाद का कारण बना।
इस फैसले की नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के श्रीनगर सांसद आगा रुहुल्लाह मेहदी और PDP विधायक वहीद पारा ने आलोचना की है। मेहदी ने कहा कि पुस्तकालय ज्ञान और इतिहास को संरक्षित रखने के लिए होते हैं, जबकि पारा ने इस समीक्षा को “इतिहास को मिटाने की प्रक्रिया” बताया। इससे पहले 4 जुलाई को जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने दो पुस्तकों को “अनुचित सामग्री” का हवाला देते हुए वापस लेने के निर्देश दिए थे। इनमें “Personalities and Legends of J&K” और “Great Personalities of Jammu and Kashmir” शामिल हैं।
कश्मीर यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार नसीर इक़बाल ने पुष्टि की कि विभागों को राष्ट्रीय हित के विरुद्ध मानी जाने वाली सामग्री की पहचान कर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं, स्कूल शिक्षा निदेशक नसीर अहमद वानी ने सरकारी, निजी स्कूलों और कोचिंग संस्थानों को 19 जुलाई तक सभी पुस्तकों की समीक्षा कर अनुपालन रिपोर्ट जमा करने का आदेश दिया है। उधर, कानूनी और सार्वजनिक नीति के क्षेत्र में कार्यरत संस्था Research and Advocacy Group (RAAG) ने राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) से इस मामले की जांच की मांग की है। संस्था का आरोप है कि विवादित सामग्री वाली पुस्तकों का सरकारी स्कूलों में पहुंचना बच्चों के अधिकारों और शिक्षा संबंधी प्रावधानों के अनुरूप नहीं है।
