जयपुर। राजस्थान की राजधानी जयपुर में स्थित जल महल सिर्फ एक खूबसूरत इमारत नहीं, बल्कि भारतीय वास्तुकला का ऐसा अद्भुत नमूना है, जो सदियों बाद भी लोगों को हैरान करता है। मान सागर झील के बीचों-बीच बना यह महल पहली नजर में पानी पर तैरता हुआ नजर आता है, लेकिन इसके पीछे छिपा इतिहास बेहद खास है। जल महल का निर्माण 1699 में महाराजा सवाई प्रताप सिंह ने करवाया था, जबकि बाद में महाराजा जय सिंह द्वितीय ने इसे नया स्वरूप दिया। यह महल राजाओं का निवास नहीं था, बल्कि शाही परिवार के मनोरंजन, पिकनिक और शिकार यात्राओं के लिए बनाया गया था।
इस पांच मंजिला इमारत की सबसे बड़ी खासियत यह है कि, झील में पानी भरने पर इसकी चार मंजिलें पूरी तरह पानी में डूब जाती हैं और केवल ऊपरी हिस्सा दिखाई देता है। प्राचीन इंजीनियरिंग का कमाल यह है कि, सदियों तक पानी में रहने के बावजूद इसकी संरचना मजबूत बनी हुई है। महल को मजबूत बनाने के लिए चूना, गुड़, गुग्गल और मेथी जैसे प्राकृतिक पदार्थों से तैयार विशेष मिश्रण का इस्तेमाल किया गया था, जो इसे नमी से बचाता है। जल महल का ‘चमेली बाग’ और इसकी राजस्थानी-मुगल वास्तुकला पर्यटकों को आकर्षित करती है। कभी प्रदूषण से जूझ रही मान सागर झील आज प्रवासी पक्षियों का ठिकाना बन चुकी है। जयपुर घूमने आने वाले पर्यटकों के लिए जल महल इतिहास, प्रकृति और वास्तुकला का अनोखा संगम है, जहां सूर्योदय और सूर्यास्त का नजारा बेहद मनमोहक दिखाई देता है।


