नई दिल्ली/काठमांडू। भारत-नेपाल सीमा विवाद को लेकर नेपाल सरकार ने एक बार फिर बातचीत के जरिए समाधान निकालने की इच्छा जताई है। नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने बुधवार को संसद में कहा कि, भारत और नेपाल के बीच सीमा से जुड़े सभी मतभेदों का समाधान ऐतिहासिक दस्तावेजों, पुराने नक्शों और द्विपक्षीय कूटनीतिक वार्ता के माध्यम से ही संभव है। उन्होंने स्पष्ट किया कि, नेपाल अपने पड़ोसी भारत के साथ दशकों पुराने मैत्रीपूर्ण संबंधों और आपसी संवेदनाओं का पूरा सम्मान करता है।
विदेश मंत्री ने कहा कि, सीमा प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए दोनों देशों के बीच स्थापित संयुक्त तंत्र लगातार काम कर रहे हैं। खासकर सुस्ता क्षेत्र में सीमा प्रबंधन और समन्वय को लेकर दोनों देशों के अधिकारियों के बीच नियमित संवाद जारी है। उनका कहना था कि, सीमा क्षेत्रों में चल रहे अधिकांश कार्य आपसी सहमति और सहयोग से आगे बढ़ रहे हैं। संसद के ऊपरी सदन में सांसदों के सवालों का जवाब देते हुए खनाल ने प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह के हालिया बयान का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि, प्रधानमंत्री ने पहले स्वीकार किया था कि सीमा से जुड़े कुछ मुद्दों पर नेपाल की ओर से भी दावे और अतिक्रमण के आरोप हैं। हालांकि, सरकार का मौजूदा रुख यही है कि सभी विवादों का समाधान केवल भारत और नेपाल के बीच सीधे संवाद से होना चाहिए।
गौरतलब है कि, 31 मई 2026 को प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने सीमा विवाद के समाधान के लिए चीन और ब्रिटेन जैसे तीसरे पक्ष की संभावित भूमिका का उल्लेख किया था। भारत ने इस प्रस्ताव को स्पष्ट रूप से अस्वीकार करते हुए कहा था कि दोनों देशों के बीच सभी द्विपक्षीय मुद्दों का समाधान केवल आपसी बातचीत के माध्यम से ही किया जाएगा। नेपाल के विदेश मंत्री के ताजा बयान को दोनों देशों के रिश्तों में सकारात्मक संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

