रायगढ़। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में सुशासन की अवधारणा केवल योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन तक सीमित नहीं है, बल्कि संकट की घड़ी में हर नागरिक तक समय पर सहायता पहुंचाना भी इसकी प्राथमिकता है। रायगढ़ जिले में संवेदनशील और मानवीय प्रशासन का एक प्रेरक उदाहरण सामने आया है, जहां लगभग 100 दिनों से लापता मानसिक रूप से अस्वस्थ युवक रामदास महंत की सोशल मीडिया से मिली सूचना के आधार पर खोजबीन कर जिला प्रशासन ने उनकी सकुशल घर वापसी सुनिश्चित की है।
पुसौर विकासखंड के ग्राम पुटकापुरी निवासी रामदास महंत मानसिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण करीब 100 दिन पहले घर से निकल गए थे। परिजनों और ग्रामीणों ने लगातार उनकी तलाश की, लेकिन कोई सफलता नहीं मिली। इसी बीच सोशल मीडिया के माध्यम से उनके राजस्थान के सिरोही जिले में होने की सूचना प्राप्त हुई। सूचना मिलते ही कलेक्टर एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में जिला प्रशासन तत्काल सक्रिय हो गया। संबंधित थाना प्रभारी ने राजस्थान स्थित मानव सेवा आश्रम से संपर्क किया, जहां पुष्टि हुई कि रामदास महंत पिछले लगभग 15 दिनों से सुरक्षित हैं।
इसके बाद जिला प्रशासन ने उनकी घर वापसी के लिए त्वरित व्यवस्था की। ग्राम पुटकापुरी के कोटवार टिकस सिदार और जीतेश महंत को राजस्थान भेजा गया। प्रशासन ने यात्रा के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई और रेल आरक्षण की व्यवस्था भी सुनिश्चित की। आरक्षण में आई तकनीकी कठिनाइयों के समाधान में क्षेत्रीय सांसद राधेश्याम राठिया का भी महत्वपूर्ण सहयोग रहा। 30 जून 2026 को रामदास महंत को राजस्थान से छत्तीसगढ़ के लिए रवाना किया गया और अब वे सकुशल अपने गांव लौट रहे हैं, जहां उनका परिवार और ग्रामीण भावुक होकर उनके स्वागत की तैयारी में हैं।
ग्राम पंचायत पुटकापुरी के सरपंच रमाकांत पटेल ने बताया कि रामदास की मानसिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण वे घर से निकल गए थे। सोशल मीडिया के माध्यम से उनके राजस्थान में होने की जानकारी मिलने के बाद भी प्रारंभ में परिवार का कोई सदस्य उन्हें लेने जाने के लिए तैयार नहीं हुआ। ऐसे समय में ग्रामीणों ने आगे आकर जिम्मेदारी निभाई और जिला प्रशासन तथा पुलिस प्रशासन के सहयोग से उनकी घर वापसी का मार्ग प्रशस्त किया। प्रशासन ने यात्रा के लिए 15 हजार रुपये की आर्थिक सहायता भी उपलब्ध कराई। इस पूरे प्रयास में ग्राम के लक्ष्मीकांत पटेल, मनोज गोयल, जीवन पटेल, जय पटेल, धुराउ महंत, विशंभर महंत सहित अनेक ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी रही।
