फाइटर जेट पुर्जों में बड़ा फर्जीवाड़ा: HAL ने सप्लायर कंपनी पर दर्ज कराई एफआईआर, 3 साल के लिए किया ब्लैकलिस्ट

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बेंगलुरु। भारत के स्वदेशी लड़ाकू विमान लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (LCA) Mk-1A प्रोजेक्ट में एक बेहद चौंकाने वाला और देश की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर फर्जीवाड़ा सामने आया है। एक सप्लायर कंपनी द्वारा फाइटर जेट के कलपुर्जों की गुणवत्ता को लेकर नकली टेस्ट रिपोर्ट जमा करने का मामला उजागर होने के बाद, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ने कड़ा रुख अपनाया है। एचएएल ने हैदराबाद की सप्लायर कंपनी ‘टेक एयरो डिवाइस’ (TEC Aero Devices) के खिलाफ बेंगलुरु पुलिस में एफआईआर (FIR) दर्ज करा दी है।

इस पूरे मामले की शुरुआत मार्च 2022 में हुई थी, जब एचएएल के एयरक्राफ्ट डिवीजन ने एलसीए एमके-1ए प्रोजेक्ट के लिए टेक एयरो डिवाइस को 18 परचेज ऑर्डर दिए थे। शुरुआती तकनीकी जांच और सैंपल्स की समीक्षा के बाद कंपनी को 35 श्रेणियों के तहत कुल 172 प्रकार के पुर्जे बनाने की मंजूरी मिली थी। लेकिन जब थोक में माल की डिलीवरी का समय आया, तो सप्लायर ने पुर्जों की मजबूती, कठोरता (हार्डनेस), ब्रेक लोड और माइक्रोस्ट्रक्चर एनालिसिस जैसी बेहद संवेदनशील जांचों से जुड़ी 199 टेस्ट रिपोर्ट्स एचएएल को सौंपीं। आंतरिक जांच में खुलासा हुआ कि लड़ाकू विमान की सुरक्षा तय करने वाली ये सभी रिपोर्ट्स पूरी तरह फर्जी थीं।

धोखाधड़ी का पता चलते ही एचएएल ने तुरंत सख्त कार्रवाई की। कंपनी को कारण बताओ नोटिस जारी करने के बाद, टेक एयरो डिवाइस को तीन साल के लिए ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है। अब यह कंपनी 10 मार्च, 2027 तक एचएएल के साथ कोई नया कारोबार नहीं कर सकेगी। हालांकि, इस पूरे मामले में राहत की बात यह रही कि सजगता के चलते एचएएल ने विवादित पुर्जों के एवज में सप्लायर को कोई भुगतान नहीं किया, जिससे सरकारी खजाने को नुकसान नहीं हुआ।