नई दिल्ली। ईरान युद्ध के कारण वैश्विक बाजार में कच्चे तेल और गैस की कीमतों में आई भारी तेजी ने भारत सरकार को घरेलू स्तर पर बड़े कदम उठाने के लिए मजबूर कर दिया है। विदेशों पर निर्भरता कम करने और ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए सरकार ने देश के भीतर छिपे तेल और प्राकृतिक गैस के भूमिगत भंडारों का पता लगाने के लिए एक राष्ट्रव्यापी महा-सर्वेक्षण (Mega Survey) शुरू करने का फैसला किया है।
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले हाइड्रोकार्बन महानिदेशालय (DGH) ने इसके लिए वैश्विक निविदा जारी कर आधुनिक कंपनियों को आमंत्रित किया है। इस मेगा प्रोजेक्ट के तहत देश के प्रमुख तलछटी बेसिनों (Sedimentary Basins) में अत्याधुनिक ‘3D भूकंपीय सर्वेक्षण’ (3D Seismic Survey) किया जाएगा। साथ ही, पुराने भूगर्भीय डेटा को हाई-लेवल कंप्यूटिंग और आधुनिक तकनीकों के जरिए दोबारा प्रोसेस किया जाएगा, ताकि जमीन के नीचे मौजूद उन संभावित हाइड्रोकार्बन भंडारों का सटीक पता लगाया जा सके जो पुरानी तकनीकों से छूट गए थे।
यह विशाल भूवैज्ञानिक सर्वे देश के पूर्वी तट पर बंगाल-पूर्णिया, महानदी, कृष्णा-गोदावरी, कावेरी और अंडमान के अपतटीय क्षेत्रों में चलाया जाएगा। आंकड़ों के मुताबिक, अकेले बंगाल-पूर्णिया और महानदी के सर्वे में 45,000 किलोमीटर की लाइनें शामिल होंगी। इसके अलावा अंडमान बेसिन में 43,000 किमी, कृष्णा-गोदावरी में 43,000 किमी और कावेरी बेसिन में 30,000 किमी का क्षेत्र कवर किया जाएगा। इस पूरे अभियान को दो साल के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। वर्तमान में भारत अपनी जरूरत का लगभग 85 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है, जिससे अर्थव्यवस्था पर भारी बोझ पड़ता है। सरकार का यह रणनीतिक कदम घरेलू उत्पादन बढ़ाकर भारत को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में गेमचेंजर साबित हो सकता है।
