ग्वालियर। मध्य प्रदेश के ग्वालियर में मीजल्स यानी खसरे की दस्तक ने स्वास्थ्य विभाग की नींद उड़ा दी है। शहर के जयारोग्य अस्पताल (JAH) के बाल रोग विभाग में संदिग्ध लक्षणों के साथ आठ बच्चों को भर्ती किया गया है, जिनमें से एक बच्चे की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। चूंकि ये सभी बच्चे शहर के अलग-अलग इलाकों से आए हैं, इसलिए विशेषज्ञों ने संक्रमण के तेजी से फैलने की आशंका जताई है। प्रशासन ने अब प्रभावित इलाकों में विशेष निगरानी और ‘अलर्ट मोड’ जारी कर दिया है।
मीजल्स (Measles) एक बेहद संक्रामक वायरल बीमारी है, जो रूबेला वायरस के कारण होती है। यह हवा के जरिए छींकने या खांसने से बिजली की गति से फैलती है। डॉक्टरों के मुताबिक, इसके शुरुआती लक्षणों को पहचानना बेहद जरूरी है। यदि किसी बच्चे को तेज बुखार के साथ लगातार खांसी, जुकाम, आंखों का लाल होना या चेहरे से शुरू होकर पूरे शरीर पर लाल दाने उभर रहे हों, तो इसे बिल्कुल भी नजरअंदाज न करें। मुंह के अंदर सफेद या लाल धब्बे दिखना भी इस बीमारी का प्रमुख संकेत है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि खसरे से बचाव का एकमात्र और सबसे प्रभावी हथियार एमएमआर (MMR) का टीका है। यह टीका बच्चों को 9-12 महीने और फिर 16-24 महीने की उम्र में अनिवार्य रूप से लगवाना चाहिए। यदि समय पर इलाज और टीकाकरण न हो, तो यह बीमारी बच्चों के लिए जानलेवा भी साबित हो सकती है। फिलहाल, स्वास्थ्य विभाग की टीमें प्रभावित क्षेत्रों में बच्चों के टीकाकरण की स्थिति की जांच कर रही हैं ताकि इस ‘आउटब्रेक’ को समय रहते रोका जा सके।
