खैरागढ़। जिला मुख्यालय के वार्ड क्रमांक 1 पिपरिया से विकास के दावों की पोल खोलती एक दर्दनाक तस्वीर सामने आई है। यहाँ की जनता बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रही है, जबकि नगर पालिका की लापरवाही का आलम यह है कि बिना जलापूर्ति किए ही नियमित रूप से पानी टैक्स वसूला जा रहा है। कागजों में पाइपलाइन बिछ चुकी है, घरों में नल के कनेक्शन भी लग चुके हैं, लेकिन हकीकत यह है कि, इन नलों से पिछले कई वर्षों में पानी की एक बूंद भी नहीं टपकी है।

वार्ड की स्थिति इतनी बदतर है कि, लोग पिछले 7-8 सालों से अपनी मेहनत की कमाई निजी टैंकरों पर लुटा रहे हैं। स्थानीय निवासी शेख इस्माइल की कहानी व्यवस्था की नाकामी का सबसे बड़ा प्रमाण है; वे अब तक पानी खरीदने में करीब 1.70 लाख रुपये खर्च कर चुके हैं। वहीं शबाना बेगम और प्रेमलता वर्मा जैसी गृहणियों का कहना है कि, उन्हें पानी के लिए दूर-दराज के बोरिंगों पर भटकना पड़ता है या पड़ोसियों के सामने हाथ फैलाना पड़ता है। सबसे विचलित करने वाली बात केवड़ा मारकंडे ने बताई, जिन्हें पानी भरने के लिए अपने छोटे बच्चों को घर में बंद करके बाहर जाना पड़ता है।

जनप्रतिनिधियों की बेरुखी और नगर पालिका की इस ‘अवैध’ टैक्स वसूली से वार्डवासियों का गुस्सा अब फूट पड़ा है। चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे करने वाले नेता अब गायब हैं, जिससे नाराज होकर नागरिकों ने अब सड़क पर उतरकर आंदोलन करने की चेतावनी दी है। खैरागढ़ के बीचों-बीच बसे इस वार्ड की बदहाली यह सवाल खड़ा करती है कि, आखिर जनता से लिए गए टैक्स का पैसा जा कहाँ रहा है और प्रशासन इस मानवीय संकट पर मौन क्यों है।
