ईरान-US तनाव के बीच भारत के पास कितना तेल? सरकार ने बताया LPG और पेट्रोल-डीजल का मौजूदा स्टॉक

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नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में करीब 76 दिनों से ईरान और अमेरिका का टकराव जारी है। इस्राइल भी लड़ाई में हिस्सा ले रहा है। इस कारण तेल-गैस को लेकर चिंता गहराने लगी है। खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से संकट को देखते हुए वर्क फ्रॉम होम, कार पूलिंग जैसे विकल्पों को अपनाने की अपील की है। इसी बीच केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने भी जनता से पीएम मोदी के सुझावों का पालन करने का आग्रह किया, जिससे आयात खर्च कम किया जा सके। उन्होंने कच्चे तेल के भंडार और ईंधन आपूर्ति को लेकर सरकार की तरफ से किए जा रहे उपाय भी गिनाए। दरअसल सरकार ने पश्चिम एशिया संकट के बीच ऊर्जा आपूर्ति में आने वाली बाधाओं का सामना किया है। हालात को संभालते हुए लोगों पर न्यूनतम बोझ डाला गया। एलपीजी का घरेलू उत्पादन बढ़ाया गया है। यह 36,000 से 54,000 मीट्रिक टन प्रतिदिन हो गया है। उन्होंने इसे अविश्वसनीय उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा, पश्चिम एशिया में तनाव से उपजे हालात के कारण भारत की तेल कंपनियों को प्रतिदिन 1,000 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है। कुल अंडर रिकवरी यानी नुकसान बढ़कर1,98,000 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है।

आपको बता दें की मौजूदा भंडार से जुड़े पहलू पर केंद्रीय मंत्री पुरी ने कहा कि भारत के पास 60 दिनों का कच्चा तेल है। 60 दिनों का एलएनजी और 45 दिनों का एलपीजी स्टॉक भी है। आपूर्ति पक्ष में कोई समस्या नहीं है। पिछले चार साल से कीमतें नहीं बढ़ाई गई हैं। आखिरी बार 2022 में कीमतें बढ़ी थीं। किसी ने कहा कि पांच राज्यों में चुनाव के बाद कीमतों में उछाल आएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। वहीं CII के सालाना शिखर सम्मेलन में अपने संबोधन के दौरान पुरी ने कहा, अगर आप तिमाही के आंकड़ों पर नजर डालें, तो नुकसान 1 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। ऐसे में, आप इस स्थिति को आखिर कब तक बनाए रख सकते हैं? कच्चे तेल की कीमतें पहले लगभग 64 या 65 डॉलर प्रति बैरल के आसपास हुआ करती थीं। अब यह बढ़कर 115 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं। उन्होंने कहा कि वैश्विक ऊर्जा का 20 फीसदी होर्मुज जलडमरूमध्य से आता था। भारत के कच्चे तेल का 85 फीसदी आयात इसी क्षेत्र से होता था। एलपीजी का लगभग 60 फीसदी आयात भी वहीं से होता था। संकट से पहले एलपीजी का घरेलू उत्पादन 35,000-36,000 मीट्रिक टन था। सरकार ने इसे बढ़ाकर 54,000 मीट्रिक टन कर दिया है। भारत पेट्रोल की खपत में 6 फीसदी की वृद्धि हुई है, फिर भी देश में कहीं कमी नहीं हुई। हर पेट्रोल पंप पर पेट्रोल और डीजल उपलब्ध है, एलपीजी आपूर्ति भी पर्याप्त है। उन्होंने लोगों से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सुझावों का पालन करने का आग्रह किया, ताकि आयात खर्च कम हो। पुरी ने दोहराया कि पर्याप्त स्टॉक है, इसलिए घबराने की आवश्यकता नहीं है।