दुनिया अभी कोरोना महामारी के जख्मों से उबरी ही थी कि, एक क्रूज शिप पर ‘हंतावायरस’ के फैलने की खबर ने वैश्विक स्तर पर हड़कंप मचा दिया है। इस जहाज पर चूहों से फैली इस दुर्लभ बीमारी के कारण तीन यात्रियों की मौत हो गई, जिसके बाद लोग एक और संभावित महामारी (Pandemic) को लेकर डरे हुए हैं। हालांकि, वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (WHO) ने स्पष्ट किया है कि यह ‘अगला कोविड’ नहीं है। WHO की डायरेक्टर मारिया वैन केरखोव के अनुसार, यह एक गंभीर संक्रमण जरूर है, लेकिन आम लोगों के लिए इसका जोखिम कम है क्योंकि यह कोरोना की तरह इंसानों के बीच आसानी से नहीं फैलता।

हंतावायरस कोई नया वायरस नहीं है, बल्कि दशकों से एशिया और यूरोप में इसके मामले सामने आते रहे हैं। यह मुख्य रूप से चूहों के मल, मूत्र या लार के संपर्क में आने से फैलता है। संक्रमण तब होता है जब लोग चूहों वाली गंदी जगहों (जैसे केबिन या शेड) की सफाई करते हैं और वहां की दूषित हवा में सांस लेते हैं। इसके लक्षण शुरुआत में फ्लू जैसे लगते हैं, जिसमें बुखार, ठंड लगना और मांसपेशियों में दर्द शामिल है। लेकिन स्थिति बिगड़ने पर फेफड़ों में पानी भर जाता है (हंतावायरस पल्मोनरी सिंड्रोम) या किडनी फेलियर (हेमोरेजिक फीवर) जैसी जानलेवा स्थिति बन सकती है।
कोविड-19 और हंतावायरस के बीच सबसे बड़ा अंतर इनके फैलने की रफ्तार और घातकता में है। जहाँ कोविड-19 हवा के जरिए एक इंसान से दूसरे इंसान में बिजली की तेजी से फैलता है, वहीं हंतावायरस का इंसान से इंसान में संक्रमण बेहद दुर्लभ है। हालांकि, डराने वाली बात यह है कि हंतावायरस में मृत्यु दर (Death Rate) कोरोना के मुकाबले कहीं अधिक है। सरल शब्दों में कहें तो, कोरोना का प्रसार क्षेत्र बड़ा है लेकिन हंतावायरस अपनी गंभीरता के कारण कहीं अधिक खतरनाक और जानलेवा साबित होता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि पैनिक करने के बजाय स्वच्छता पर ध्यान देना ही इससे बचने का सबसे कारगर तरीका है।
