मिडिल ईस्ट तनाव का असर: US-ईरान टकराव से एशियाई बाजार धड़ाम, कच्चा तेल 101 डॉलर के पार

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मुंबई। पश्चिम एशिया में युद्ध के नगाड़ों ने वैश्विक अर्थव्यवस्था की नींद उड़ा दी है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव और होर्मुज स्ट्रेट में हुई ताज़ा गोलीबारी ने एशियाई बाजारों को पूरी तरह लाल निशान पर धकेल दिया है। इस भू-राजनीतिक अस्थिरता का सीधा असर निवेशकों के भरोसे पर पड़ा है, जिससे सिडनी से लेकर सियोल तक के बाजारों में भारी हड़कंप मच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर ईरान को कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए आग में घी डालने का काम किया है। ट्रंप ने ईरानी नेतृत्व को “पागल” करार दिया और साफ कहा कि उन्हें परमाणु हथियारों तक कभी पहुँचने नहीं दिया जाएगा। उन्होंने कड़े लहजे में धमकी दी है कि यदि ईरान ने ‘FAST’ डील साइन नहीं की, तो अमेरिका भविष्य में और भी “हिंसक तरीके” से जवाबी कार्रवाई करेगा, जिससे शांति वार्ता की उम्मीदें लगभग खत्म हो गई हैं।

सप्लाई चेन बाधित होने के डर से अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल $101 प्रति बैरल के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर गया है। इसका सबसे बुरा असर एशियाई इंडेक्स पर दिखा, जहाँ S&P ASX 200, हैंग सेंग और KOSPI में सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई। चूँकि अधिकांश एशियाई अर्थव्यवस्थाएं कच्चे तेल की शुद्ध आयातक (Net Importers) हैं, इसलिए तेल की इन बढ़ती कीमतों ने सीधे उनकी आर्थिक स्थिरता को चुनौती दी है। बोफ़ा सिक्योरिटीज़ की रिपोर्ट इस संकट की गहराई को स्पष्ट करती है, जिसमें बताया गया है कि एशिया में औसत महंगाई मार्च में बढ़कर 2.2% हो गई है, जो फरवरी में 1.9% थी। रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक ऊर्जा कीमतों का सीधा असर घरेलू रिटेल फ्यूल पर पड़ रहा है, जिससे आम जनता की जेब पर बोझ बढ़ना तय है। विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि यदि खाड़ी क्षेत्र में यह सैन्य गतिरोध कम नहीं हुआ, तो दुनिया एक बड़े ऊर्जा संकट और बेकाबू महंगाई की चपेट में आ सकती है।