पश्चिम बंगाल। पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। विधानसभा चुनाव 2026 में भारतीय जनता पार्टी की जीत के बाद भी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा इस्तीफा न देने पर बहस तेज हो गई है। इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील महेश जेठमलानी ने कड़ा बयान देते हुए इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ बताया है। जेठमलानी ने कहा कि चुनाव में जनादेश हारने के बाद किसी भी मुख्यमंत्री का पद पर बने रहना “संवैधानिक और नैतिक रूप से गलत” है। उनके अनुसार, यदि कोई नेता इस्तीफा देने से इनकार करता है, तो यह स्थिति “अवैध कब्जे” जैसी हो जाती है। उन्होंने यह भी कहा कि, ऐसी स्थिति में राज्यपाल को संवैधानिक प्रक्रिया के तहत कार्रवाई करनी चाहिए।
उन्होंने आगे कहा कि, लोकतंत्र में हार स्वीकार करना अनिवार्य है और जनादेश का सम्मान करना हर निर्वाचित प्रतिनिधि की जिम्मेदारी है। इस पूरे मामले को लेकर राजनीतिक माहौल और गरमा गया है, जहां भाजपा और टीएमसी के बीच तीखी बयानबाजी शुरू हो गई है। टीएमसी इसे राजनीतिक बदले की भावना बता रही है, जबकि भाजपा नेताओं ने भी मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग तेज कर दी है। जेठमलानी ने चेतावनी दी कि यदि स्थिति बनी रहती है तो कानूनी रूप से भी गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं। इस बयान के बाद बंगाल की राजनीति में तनाव और बढ़ गया है और संवैधानिक बहस तेज हो गई है।
