अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का सीधा असर अब पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर दिखने लगा है। वैश्विक स्तर पर तेल आपूर्ति बाधित होने और कीमतों में तेज उछाल के चलते पाकिस्तान गंभीर ऊर्जा संकट से जूझ रहा है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने हाल ही में स्वीकार किया कि, पिछले दो वर्षों में हासिल आर्थिक स्थिरता अब खतरे में है और हालात तेजी से बिगड़ते जा रहे हैं।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पाकिस्तान का साप्ताहिक तेल आयात बिल लगभग 300 मिलियन डॉलर से बढ़कर करीब 800 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया है। इस बढ़ोतरी ने देश के विदेशी मुद्रा भंडार और बजट संतुलन पर भारी दबाव डाल दिया है। सरकार ने स्थिति पर नजर रखने के लिए एक विशेष टास्क फोर्स का गठन किया है, जो रोजाना ऊर्जा संकट की निगरानी कर रही है।
तनाव कम करने के लिए पाकिस्तान ने अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता की कोशिश भी की है। इस्लामाबाद में हुई वार्ता को सरकार ने सकारात्मक बताया है, लेकिन स्थायी समाधान अभी दूर है। वहीं वैश्विक बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतें 119 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं, जिससे ईंधन महंगा होता जा रहा है। संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) ने भी चेतावनी दी है कि, वैश्विक संघर्ष और महंगाई के चलते लाखों लोग गरीबी की ओर धकेले जा सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति विकासशील देशों के लिए और अधिक आर्थिक संकट पैदा कर सकती है।
