कांकेर। बस्तर संभाग के कांकेर जिले में बेरोजगारी एक गंभीर चुनौती बनती जा रही है। रोजगार कार्यालय में 60 हजार 319 युवाओं के पंजीकृत होने के आंकड़े ने रोजगार की स्थिति पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। इनमें बड़ी संख्या शिक्षित और डिग्रीधारी युवाओं की बताई जा रही है, जिन्हें योग्यता होने के बावजूद नौकरी नहीं मिल पा रही। सरकारी भर्तियों की धीमी रफ्तार और खाली पदों पर नियुक्ति नहीं होने से युवाओं में निराशा बढ़ रही है। लंबे समय से भर्ती प्रक्रियाओं के अटकने से कई अभ्यर्थियों की उम्मीदें कमजोर पड़ी हैं। दूसरी ओर निजी क्षेत्र में भी रोजगार के अवसर सीमित हैं, जिससे स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो गई है।
रोजगार मेले और प्लेसमेंट कैंप, जो कभी युवाओं के लिए उम्मीद का जरिया माने जाते थे, अब पहले जैसी सक्रियता नहीं दिखा पा रहे। इसका असर यह है कि, कई युवा मजबूरी में छोटे-मोटे काम या अस्थायी रोजगार अपनाने को विवश हैं। महिलाओं की भी बड़ी संख्या रोजगार कार्यालय में पंजीकृत है, जो स्थिति की गंभीरता को दर्शाती है। स्थानीय स्तर पर बेरोजगारी अब सामाजिक और राजनीतिक मुद्दा बनती जा रही है। युवाओं का कहना है कि, अब उन्हें सिर्फ घोषणाएं नहीं, बल्कि ठोस नियुक्तियां चाहिए। विशेषज्ञ मानते हैं कि, कौशल विकास, नई भर्तियां और निजी निवेश के बिना हालात सुधरना मुश्किल है। फिलहाल कांकेर में रोजगार का सवाल युवाओं की सबसे बड़ी चिंता बन चुका है।
