फीस नहीं, RTE के तहत गरीब होनहार टॉप स्कूल में पढ़ाई कर गढ़ रहे भविष्य

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रायपुर। छत्तीसगढ़ में विष्णु सरकार ने Right of Children to Free and Compulsory Education Act 2009 की धारा 12 (1) (ग) के तहत शैक्षणिक सत्र 2026-27 से केवल पहली कक्षा को ही प्रवेश घोषित कर दिया है. इसके अलावा, इस सत्र में RTE सीटों की संख्या में बढ़ोतरी की गई है. सरकार का मानना है कि इस फैसले से RTE सीटों के प्रकटीकरण में हो रही अनियमितताओं पर रोक लगेगी. इसके अलावा, आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्ग के छात्रों को अधिनियम का वास्तविक लाभ मिल सकेगा.

ली जानकारी के मुताबिक, RTE के अंतर्गत शैक्षणिक सत्र 2026-27 में 54 हजार 824 सीटों पर एडमिशन दिए जाएंगे. पिछली साल पहली कक्षा में केवल 9375 सीटों का प्रकटीकरण किया गया था, जो साल 2026-27 में बढ़कर 19 हजार 489 हो गया है. बता दें कि सत्र 2026-27 में प्रदेश की निजी स्कूलों में RTE केजी-2 में पढ़ने वाले छात्रों की संख्या 35 हजार 335 है, जो आगामी शैक्षणिक सत्र 2026-27 में पहली कक्षा में प्रवेश करेंगे. इतने होंगे एडमिशन इस हिसाब से साल 2026-27 में पहली कक्षा में कुल 54 हजार 824 छात्रों को एडमिशन मिलेगा. वहीं अब RTE सीटों का निर्धारण यू-डाइस पोर्टल पर दर्ज पिछले साल की पहली कक्षा की प्रविष्ट संख्या के आधार पर किया जा रहा है. इससे निजी स्कूलों की तरफ से नोडल अधिकारियों को दी जाने वाली गलत जानकारी पर रोक लगी है. वहीं इस फैसले से स्तरहीन निजी संस्थानों के संचालन पर भी प्रभावी नियंत्रण स्थापित होगा. इसके अलावा, शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही भी सुनिश्चित की जाएगी.

पुरानी व्यवस्था में क्या दिक्कत थी? 1. प्रवेश में उलझन पहले RTE में प्रवेश के कई एंट्री पॉइंट (नर्सरी, केजी-1, पहली कक्षा) थे, जिससे प्रक्रिया समझना मुश्किल होता था और पारदर्शिता भी कम थी. 2. बड़े स्कूलों की चालाकी कई बड़े स्कूल अपनी असली क्षमता से कम सीटें दिखाकर RTE की सीटें छिपा लेते थे. 3. छोटे स्कूलों की गड़बड़ी कुछ छोटे स्कूल क्षमता से ज्यादा बच्चों को दिखाकर फायदा उठाते थे, जिससे पढ़ाई की गुणवत्ता प्रभावित होती थी. Also Read – डैम में डूबने से किशोर की मौत, गोताखोरों ने शव बरामद किया