एक हजार की सहायता से आत्मनिर्भरता तक, उषा ने लिखी सफलता की नई कहानी

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रायपुर। यह कहा जाता है “जहां चाह वहां राह”। अभी तक किसी भी सरकारी योजना के ऐसे हितग्राही जो शासन के किसी भी प्रकार की सहायता को ग्राह्य करते हैं और उसे किसी प्रकार का व्यय में खर्च करते हैं सामान्यतः व्यापार करने के लिए शासन में ऋण या सब्सिडी वाली योजना होती है इससे लाभान्वित योजना से कोई व्यवसाय शुरू करते आए हैं। मगर ऐसा भी हुआ है कि कोई हितग्राही मूलक योजना का लाभ लेकर कोई भी अपना व्यवसाय शुरू किया है और उसे आगे भी बढ़ा रहा है। यह कहानी है उषा बैस की जो जिले के मंदिर हसौद के ग्राम पिपरहट्टा की रहने वाली है। उषा बताती है कि, एक समय में इनकी आर्थिक स्थिति गंभीर थी। लेकिन जब मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में महतारी वंदन योजना की शुरूआत हुई तब उनके जीवन में बदलाव आया।

रायपुर जिले के भानसोज सेक्टर, मंदिर हसौद परियोजना अंतर्गत आने वाले इस गांव की निवासी उषा को आंगनबाड़ी कार्यकर्ता खोमेश्वरी साहू ने इस योजना के बारे में जानकारी दी और आवेदन के लिए प्रेरित किया। योजना के तहत नियमित रूप से मिलने वाली राशि को उषा ने खर्च करने के बजाय बचत के रूप में जमा करना शुरू किया। करीब आठ महीनों में 8,000 रुपये जमा होने पर उषा ने स्वरोजगार की दिशा में कदम बढ़ाया और एक गाय खरीदी। यह निर्णय उनके जीवन का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। कुछ ही समय में गाय ने बछिया को जन्म दिया और प्रतिदिन लगभग आठ लीटर दूध देने लगी। उषा ने दूध को स्थानीय दुग्ध सहकारी समिति में बेचना शुरू किया, जिससे उन्हें नियमित आय मिलने लगी।

आज उषा का दुग्ध व्यवसाय उनके परिवार के लिए सालाना 60 हजार से 1 लाख रुपये तक की आय सुनिश्चित कर रहा है। इससे न केवल उनकी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ हुई है, बल्कि परिवार में स्थिरता और आत्मविश्वास भी बढ़ा है। उषा अपनी सफलता का श्रेय महतारी वंदन योजना और जिला प्रशासन के समय पर मिले मार्गदर्शन को देतीं हैं, और कहतीं हैं कि, राज्य शासन की इस प्रकार की योजनाएं हमें वित्तीय सहायता देती हैं साथ ही उद्यमी बनने के लिए प्रेरित करती है। बस आवश्यकता है कि, हम इस वित्तीय सहायता का सही समय पर इस्तेमाल करें जो हमें एक सफल उद्यमी बना सकती है।