बिना नॉमिनी FD का पैसा कैसे मिलेगा? जानिए पूरा कानूनी प्रोसेस

Follow Us

नई दिल्ली। देश में आज भी बड़ी संख्या में लोग सुरक्षित निवेश के तौर पर बैंक फिक्स्ड डिपॉज़िट (FD) को प्राथमिकता देते हैं। खासकर सीनियर सिटिजन दादा-दादी या नाना-नानी अपनी बचत एफडी में रखते हैं। लेकिन कई मामलों में उनके निधन के बाद परिवार को इन निवेशों की जानकारी देर से मिलती है, जिससे कानूनी जटिलताएं पैदा हो जाती हैं। अगर किसी एफडी में नॉमिनी नहीं है या वसीयत में इसका स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया है, तो संपत्ति का बंटवारा हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956 के तहत होता है। इसके अनुसार, बेटे, बेटियां और जीवनसाथी को समान अधिकार मिलता है। यदि किसी बेटे या बेटी की पहले मृत्यु हो चुकी है, तो उनके बच्चे यानी पोते-पोतियां भी उस हिस्से पर कानूनी दावा कर सकते हैं।

अक्सर यह भ्रम रहता है कि, नॉमिनी ही पैसे का मालिक होता है, लेकिन वास्तव में नॉमिनी केवल एक ट्रस्टी होता है। उसकी जिम्मेदारी बैंक से राशि प्राप्त कर उसे वास्तविक कानूनी उत्तराधिकारियों तक पहुंचाना होता है। वह उस पैसे का व्यक्तिगत उपयोग नहीं कर सकता। यदि नॉमिनी मौजूद है, तो मृत्यु प्रमाण पत्र और जरूरी दस्तावेज जमा करने के बाद बैंक उसे भुगतान कर देता है। लेकिन यदि नॉमिनी नहीं है, तो सभी कानूनी वारिसों को मिलकर बैंक में दावा करना होता है और उत्तराधिकार साबित करने वाले दस्तावेज देने होते हैं। इसके बाद ही बैंक राशि जारी करता है। इस तरह एफडी के पैसों का अधिकार पूरी तरह कानूनी वारिसों के प्रमाण और उत्तराधिकार नियमों पर निर्भर करता है।